टैगोर लाइब्रेरी का निरीक्षण करते बिहार विधानसभा के उपाध्याय। अमर उजाला
लखनऊ। बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के टैगोर पुस्तकालय का अध्ययन भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष समेत 10 अधिकारी शामिल रहे। टीम ने पुस्तकालय के प्रबंधन, सेवाओं, आधुनिकीकरण और डिजिटल संसाधनों की जानकारी ली।
प्रतिनिधिमंडल को पुस्तकालय के इतिहास और विरासत के बारे में बताया गया। वर्तमान भवन की आधारशिला 1937 में रखी गई थी और 1941 में तत्कालीन कुलपति सर मॉरिस हैलेट ने इसका उद्घाटन किया था। बाद में इसका नाम रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर रखा गया।
दल ने ऑनलाइन पब्लिक एक्सेस कैटलॉग, विशेश्वर नाथ रीडिंग हॉल, दुर्लभ कलाकृतियों एवं पांडुलिपि अनुभाग, राधाकमल मुखर्जी आर्ट गैलरी एवं संग्रहालय, ऑटोमेशन अनुभाग और साइबर लाइब्रेरी का अवलोकन किया। दुर्लभ संग्रह में फर्स्ट नेशनल एटलस ऑफ इंडिया, गुरु ग्रंथ साहिब और पाली में महाभारत समेत कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां देखीं।
17 हजार उपयोगकर्ता ले रहे ई-संसाधनों का लाभ
प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि रिमोट एक्सेस सुविधा से करीब 17 हजार पंजीकृत उपयोगकर्ता ई-संसाधनों का लाभ ले रहे हैं। इनमें 200 से अधिक शिक्षक हैं। पांच हजार से अधिक ई-पुस्तकों और 13 हजार से अधिक शोध पत्रिकाओं समेत विभिन्न विषयों के डेटाबेस तक पहुंच उपलब्ध है। प्रतिनिधिमंडल ने पुस्तकालय की आधुनिक व्यवस्था और विरासत संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। इस दौरान मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. रोली मिश्रा समेत सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष मौजूद रहे।