राममंदिर मामले पर निर्णय आने के बाद अब ट्रस्ट बनने की प्रक्रिया चल रही है तो ट्रस्ट निर्माण पर सबकी नजरें टिकी हुईं हैं। केंद्र सरकार को राम जन्मभूमि मंदिर के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने की मियाद सुप्रीम कोर्ट ने दी है। वहीं इसको लेकर खींचतान भी शुरू हो गई है। ट्रस्ट में किसको क्या भूमिका मिलेगी, कौन-कौन शामिल होगा इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।
ट्रस्ट के गठन का इंतजार विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) भी कर रही है। संगठन ने शायद इसी के चलते अभी तक चुप्पी साध रखी है। वह अपनी रणनीति स्पष्ट नहीं कर रहा है। वह नए ट्रस्ट में अपनी भूमिका को देखने के बाद ही अपने पत्ते खोलेगी। इसका संकेत वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कारसेवकपुरम में दिए।
उन्होंने कहा, अभी तो निर्णय आया है और सरकार को सारी व्यवस्थाएं ठीक करने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है। 3 महीने तक प्रतीक्षा करनी है। इसके बाद सरकार क्या व्यवस्था घोषित करती है तब सोचा जाएगा। उन्होंने कहा एक जिम्मेदार समाज और नागरिक का यह कर्तव्य है कि पहले एक उद्देश्य प्राप्त हो जाए। मंदिर के शिखर पर कलश लग जाए।
उसके बाद आने वाली पीढ़ी को क्या करना है वह सोचेगी। चंपत राय के इस बयान से यह साबित होता है कि विहिप अभी इंतजार की मुद्रा में है। हालांकि कुछ दिनों पूर्व विहिप के अंतरराष्ट्रीय सदस्य दिनेश ने कहा था कि राममंदिर के वर्तमान मॉडल के अनुरूप ही मंदिर का निर्माण होना चाहिए।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि अभी निगाहें ट्रस्ट के गठन पर टिकी हुई हैं। ट्रस्ट के गठन के बाद ही स्पष्ट होगा कि राममंदिर का निर्माण किस तरह से किया जाएगा। यह स्थिति साफ होने के बाद ही विश्व हिंदू परिषद कोई निर्णय करेगा। हम सभी दिव्य-भव्य राममंदिर का निर्माण चाहते हैं जो पूरे विश्व में अतुलनीय व अलौकिक हो।