वाराणसी के रामेश्वर प्रसाद वाही और हीरालाल। दोनों की उम्र 80 साल से ज्यादा हो चुकी है। वर्ष 1961 के जालसाजी के एक केस में इन्हें 28 साल बाद 1989 में दोषी पाया गया। एक-एक साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
दोनों ने सजा के खिलाफ अपील की, जो 27 साल तक लंबित रही। आखिरकार बीते बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले का निपटारा किया।
बेंच ने इनकी दोष सिद्धि को बहाल रखते हुए उन्हें सुनाई गई सजा को 15-15 हजार रुपये जुर्माने में बदल दिया। कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को जुर्माने की यह रकम 15 दिन में संबंधित अदालत में जमा करने केनिर्देश दिए।
न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल नेअपने फैसले में कहा कि 80 साल केऊपर के इन अपीलकर्ताओं को जेल भेजने का कोई फायदा नहीं होगा।
ऐसे में इनकी सजा को जुर्माने में तब्दील किया जाना न्यायहित में होगा। हालांकि इसमें कोई विवाद नहीं है कि दोनों अपीलकर्ता एक कंपनी के कर्मचारी थे और वे मामले में वास्तविक लाभ लेने वाले नहीं थे।