लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में कार्डियोलाॅजी विभाग के प्रमुख प्रो. आदित्य कपूर के मुताबिक, मौखिक प्रश्नावली और एक एआई-स्टेथोस्कोप से हृदय रोग का पता लगाया जा सकता है। समय पर दिल के रोगों की पहचान होने से इलाज में आसानी होती है। प्रो. आदित्य कपूर शनिवार को पीजीआई में हुई वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में बोल रहे थे।
प्रो. आदित्य कपूर ने बताया कि एआई स्टेथोस्कोप (ट्राइकॉग, एआई स्टेथ इंडिया की ओर से डिजाइन किया गया) का एसजीपीजीआई में पहले ही परीक्षण किया जा चुका है। हृदय रोग का पता लगाने में इसे काफी विश्वसनीय पाया गया है। पीजीआई के निदेशक प्रो.आरके धीमन ने बताया कि रूमेटिक हृदय रोग उन्मूलन के लिए भारत के पहले राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। इसमें एसजीपीजीआई प्रदेश सरकार और स्टैनफोर्ड बायोडिजाइन के साथ मिलकर आरएचडी रोको पहल की शुरुआत कर रहा है। स्टैनफोर्ड बायोडिजाइन, यूएसए के विशेषज्ञ प्रोफेसर अनुराग मैरल ने कहा कि वैज्ञानिक सलाहकार समिति का यह प्रयास रहेगा कि उत्तर प्रदेश पूरे भारत में आरएचडी उन्मूलन के लिए मॉडल के रूप में काम करे। बैठक की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि इस पहल का आने वाले समय में व्यापक असर देखने को मिलेगा।
दिल के रोगों का पता लगाने के लिए ऐसे काम करेगी योजना
यह समिति पूरे प्रदेश में जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों (डीईआईसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए नैदानिक प्रोटोकॉल विकसित करने का काम करेगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समिति एक सरल प्रश्नावली के माध्यम से प्रारंभिक जांच, एआई सक्षम डिजिटल स्टेथोस्कोप से जांच, जिला अस्पताल में इकोकार्डियोग्राफी और बीमारी की पुष्टि होने पर मरीज को पीजीआई रेफर करने की जिम्मेदारी निभाएगी।