ज्येष्ठ अमावस्या पर इस बार शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी, जबकि श्रद्धालु शनि देव की पूजा, दान और मंत्र जाप करेंगे। पीपल व शमी पूजा, तिल और सरसों तेल का दान विशेष फलदायी माना गया है।
ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर शनिवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। इस बार शनि जयंती के साथ वट सावित्री व्रत का विशेष संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था। श्रद्धालु व्रत रखकर शनि देव की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करेंगे।
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या पितरों के तर्पण, पितृ दोष निवारण और दान के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन गाय, कौवे और कुत्तों को भोजन कराने तथा गरीबों की सहायता करने का विशेष महत्व बताया गया है।
भारतीय नक्षत्रवाणी पंचांग के संपादक पुनीत वार्ष्णेय ने बताया कि वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती और सिंह और धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव चल रहा है। ऐसे में पीपल और शमी वृक्ष की पूजा, सरसों के तेल का दीपक जलाने, काले तिल, उड़द, लोहे के बर्तन और काले वस्त्र का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना को भी लाभकारी माना गया है।
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ज्योतिषाचार्य एसएस. नागपाल के अनुसार वट सावित्री व्रत 14 मई से शुरू होकर 16 मई को समाप्त होगा। इस दौरान महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
जानें मुहूर्त
ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे से होगी।
इसका समापन 17 मई 2026 को रात्रि 01:30 बजे पर होगा।
उदया तिथि के अनुसार, वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
व्रती महिलाएं 17 मई को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूजा के बाद व्रत खोल सकती हैं।