राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को राजभवन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर
लखनऊ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को राजभवन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया। राज्यपाल ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है।
इसने गुलामी के अंधकार में भी राष्ट्रभक्ति, एकता और जागरण का प्रकाश फैलाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के कठोर काल में जब खुलकर कुछ नहीं कहा जा सकता था, तब हमारे नागरिक, साधु-संत और स्वतंत्रता सेनानी इस गीत के माध्यम से जन-जन में आजादी की अलख जगाते थे। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी अशोक देसाई, विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल जानी, विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्ता आदि उपस्थित थे।
गंगोत्री से गंगासागर की प्रतिकृति का शिलान्यास
राज्यपाल ने राजभवन परिसर में गंगोत्री से गंगासागर की प्रतिकृति का शिलान्यास किया। राज्यपाल ने इसकी नींव की ईंट रखी। उन्होंने बताया कि गंगोत्री से गंगासागर की यह प्रतिकृति भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक यात्रा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र चार धामों की प्रतीकात्मक प्रस्तुति है। राज्यपाल ने नदियों के संरक्षण व जल संसाधनों के संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नदियां हमारी जीवनधारा हैं। उन्होंने पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को राजभवन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को राजभवन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर