यूपी में भाजपा सरकार के छह महीने पूरे होने पर राज्य के 12 लाख कर्मचारियों को को सौगात दी गई। योगी सरकार ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सातवें वेतनमान के एरियर भुगतान को मंजूरी दे दी। ये बैठक लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई।
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गौरतलब है कि राज्य वेतन समिति ने सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियां एक जनवरी 2016 से लागू करने निर्णय लिया था। लेकिन इसका नकद भुगतान जनवरी 2017 से शुरू हो सका था। कर्मचारियों को जनवरी 2016 से दिसंबर 2016 तक के एरियर का भुगतान होना है, जिस पर सरकार ने फैसला ले लिया।
इसके अलावा बैठक में प्रदेश की आबकारी नीति पर भी फैसला लिया गया। अब अवैध शराब का कारोबार करने पर मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार ने ये फैसला जहरीली शराब से होने वाली मौतों को देखते हुए लिया है।
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अवैध शराब से हुई मौत पर आरोपी को मिलेगी सजा-ए-मौत
इसके अलावा, यूपी में अवैध शराब के कारण मौत होने पर अब अभियुक्तों को सजाए मौत की भी सजा दी जा सकेगी। इसके लिए सरकार ने आबकारी एक्ट 1910 में संशोधन किया है। साथ ही एक्ट में एक नई धारा जोड़ी गई है। कैबिनेट की बैठक में आबकारी एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दे दी गई।
दो दर्जन से अधिक धाराओं में संशोधन किया गया
- फोटो : amar ujala
आबकारी अधिनियम 1910 काफी पुराना होने के कारण इस लिए इसकी दो दर्जन से अधिक धाराओं में संशोधन किया गया है। आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया कि जिन धाराओं में संशोधन किया गया है उसमें अधिनियम की धारा 3, 50, 51, 52, 53, 54, 55, 60, 62, 63, 64, 64क, 65, 66, 67, 68, 69, 69क, 70, 71, 72, 73क, 74 एवं 74 क शामिल हैं। साथ ही एक नई धारा 60 क जोड़ी गई है।
इस नई धारा में अवैध शराब से मौत या स्थाई अपंगता होने पर आजीवन कारावास या 10 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों अथवा मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है।
अफसरों को मिलेगा कठोर दंड
अवैध शराब के कारोबार को शह देने वाले विभागीय अफसरों की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर उन्हें अब कठोर दंड का प्राविधान किया गया है। आबकारी कानून में कठोर दंड का प्राविधान होने से तलाशी आदि के मामले में जरा भी लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अफसरं के खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकेगी। हालांकि गिरफ्तारी, निरुद्ध, बरामदगी, सर्च वारंट और जमानती व गैर जमानती धाराओं में संशोधन से अफसरों के अधिकारों में भी बढ़ोत्तरी की गई है।
सरकार की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया है कि फाइनेंस एक्ट 1994 (सर्विस टैक्स, जैसा 2016 में फाइनेंस एक्ट में संशोधन किया गया है) के लागू होने से प्रदेश आबकारी विभाग द्वारा आसवानी से लिए जा रहे प्रतिफल शुल्क की धनराशि पर टैकस की देयता 1 अप्रैल 2016 से लागू हो गई है। यह टैक्स 2300 करोड़ रुपये बन रहा है।
यह टैक्स अगर आसवानियों से लिया गया तो शराब और महंगी होगी और पड़ोसी राज्यों में शराब की कीमत कम होने के कारण अवैध तरीके से शराब की तस्करी बढ़ जाएगी। ऐसे में निर्णय लिया गया कि प्रतिफल शुल्क को एक्साइज ड्यूटी के रूप में लिया जाए। इसके लिए अधिनियम की धारा 30 में संशोधन किया गया है।
वहीं, कैबिनेट बैठक में सातवें वेतनमान के एरियर के भुगतान को भी योगी सरकार ने मंजूरी दे दी। इससे प्रदेश के 12 लाख राज्यकर्मचारियों को लाभ मिलेगा।