लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ भारत की रक्षा के अग्रिम मोर्चे का प्रतिनिधित्व भी करता है। उत्तराखंड में कोई भी परिवार ऐसा नहीं होगा जहां का एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बल में न हो। सीएम, सोमवार को उत्तरायणी कौथिग के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद की ओर से स्व. जनरल विपिन रावत को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली वीरता सम्मान से नवाजा गया जो उनके भाई विजय रावत ने प्राप्त किया।
कौथिग के अंतिम दिन सोमवार को सीएम योगी, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विधायक आशुतोष टंडन ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. जनरल विपिन रावत के कार्यों और योगदान को जीवंत रखने के लिए मैनपुरी के सैनिक स्कूल का नाम जनरल विपिन रावत के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, राज्य के रूप में तो अलग हो सकते हैं लेकिन सांस्कृतिक रूप से अलग नहीं हो सकते है। उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के नाम हम एक होकर काम करें यही स्व. विपिन रावत को सच्ची श्रद्घांजलि होगी। उन्होंने कहा कि जाति, मत और मजहब के नाम विभाजन को हमें समाप्त करना होगा और एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण करना होगा।
विषमुक्त जीवन जीने को किया प्रेरित
सीएम ने कहा कि अगर लंबे समय तक जीवित रहना है तो विषमुक्त जीवन व्यतीत करना होगा। हमें बगैर किसी रसायन और फर्टीलाइजर का उपयोग किए परंपरागत खेती करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमारे बचपन में मेरी मां खेती में रसायन की जगह गंगा जल का प्रयोग करती थीं।
अलग-अलग संगठन मिलकर करें काम
पर्वतीय महापरिषद की ओर से सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों के लिये एक बड़ी जगह का अलाटमेंट करने और भाषा के संरक्षण के लिये अकादमी की स्थापना की मांग पर सीएम योगी ने कहा कि गाजियाबाद में उत्तराखंड भवन के लिए जमीन दी गई है। उन्होंने कहा कि भाषा संस्थान पहले से काम कर रहा है। अलग-अलग संगठन एक साथ मिलकर काम करेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा। पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी ने मुख्यमंत्री से गढ़वाली एवं कुमांऊनी अकादमी बनाने का प्रोजेक्ट पुन: शुरू करने के लिए आदेश देने, कार्यक्रम स्थल में बगैर किसी रुकावट के कार्यक्रम संचालित करने और महापरिषद को एक बड़ी जमीन कार्यक्रम के लिएं अलॉट करने की मांग की।
गढ़वाली लोकगीत को सीएम ने किया पसंद
उत्तराखंड के लोकगायक दर्शन फस्वाण के गीत नंदा सुन्दना हे गोरा को सीएम योगी ने खूब पसंद किया। उन्होंने इस गीत को दोबारा सुना।
अंतिम दिन हुईं कई प्रतियोगिताएं
उत्तरायणी कौथिग के अंतिम दिन लोकगीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों व निबंध प्रतियोगिता के साथ पर्वत संदेश पत्रिका का विमोचन किया गया। उत्तराखंड के लोकगायक प्रहलाद सिंह मेहरा ने ऐजा मेरा दानपूरा, धानुलि कैसके जानू, ओ हिटो बोट बोट लगुनु की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं 15 वर्ष तक आयु की निबंध प्रतियोगिता में फाल्गुनी लोहुमी को प्रथम, ओजस्वी को द्वितीय स्थान मिला। 16 वर्ष आयु में मानवी जोशी प्रथम रहीं। झोड़ा प्रतियोगिताओं में दीपा ऐरी के निर्देशन में तेलीबाग रामलीला समिति को प्रथम, हेमा डोलिया एंव सुधा चंदोला के निर्देश में पंतनगर को द्वितीय, बीना रावत के निर्देशन में एलडीए कानपुर रोड को और इंद्रा नगर के दलों को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।