प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्रालय की सफाई करवा दी। भले ही मोदी इसे पेपरलेस वर्किंग का नाम न दें, लेकिन काम डिजिटल गवर्नेंस का ही है।
अब यूपी शासन ने भी ‘ग्रीन गवर्नेंस’ की पहल करते हुए सचिवालय के समस्त सरकारी भवनों को ‘पेपरलेस’ करने का फैसला किया है।
सबसे पहले यह योजना आईटी डिपार्टमेंट में लागू होगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे सचिवालय में लागू किया जाएगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना का शुभारंभ डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने के लिये खुद आवेदन कर किया।
‘ई-आफिस’ पर होगा सारा काम
मुख्यमंत्री ने शासकीय विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाने व कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए सचिवालय के समस्त भवनों को ‘पेपरलेस’ करने की पहल की है।
इसके लिए एक टीम का गठन करते हुए आईटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग को नोडल विभाग तथा यूपीडेस्को को नोडल एजेंसी नामित कर दिया है।
इस अभिवन प्रयोग में ‘ई-आफिस’ सॉफ्टवेयर का प्रयोग होगा। आईटी विभाग के विशेष सचिव जीएस नवीन कुमार ने बताया कि पूरे सचिवालय में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए दो महीने की समय सीमा दी गई है।
ये होंगे फायदे
योजना के क्रियान्वयन से विभागों द्वारा संचालित योजनाओं से संबंधित फाइलों व पत्रावलियों का मूवमेंट व निस्तारण इलेक्ट्रानिक माध्यम से तेजी से हो सकेगा।इससे फाइलों को आसानी से तत्काल ट्रैक किया जा सकेगा जिससे विभागों की कार्यक्षमता में इजाफा होगा।विभागीय कर्मचारियों को अनावश्यक प्रिंटआउट, फोटोकॉपी निकालने, फाइलों व पत्रावलियों का बोझ उठाकर विभिन्न विभागों तक लाने, ले-जाने से छुट्टी मिल जाएगी। इसके प्रिंटिंग, स्टेश्नरी आदि पर होने वाले खर्च कम होंगे।पेपरलेस ऑफिस होने से फाइलों, पत्रावलियों के फट जाने या गुम हो जाने की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।पत्रावलियों को अत्यंत सुरक्षित तरीके से स्टेट डेटा सेन्टर में स्टोर किया जायेगा।