यूपी पुलिस ने पिछले सवा तीन वर्षों में 123 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। इन मुठभेड़ों को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं, पर अधिकतर मामलों में प्रदेश पुलिस को क्लीन चिट मिल गई। मजिस्ट्रीरियल जांच में भी पुलिस बेदाग साबित हुई। पुलिस की मुठभेड़ों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर उच्च व सर्वोच्च न्यायालयों तक आवाज उठाई गई, पर कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया जिसमें सरकार की स्थिति असहज हुई हो।
ताजा मामला कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे व उसके कुछ साथियों के अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जाने का है। इनमें भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। योगी सरकार में हुई 6128 मुठभेड़ों में 123 अपराधी मारे गए और 13365 अपराधी गिरफ्तार किए गए।
पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश में 2293 अपराधी गोली लगने से घायल हुए। वहीं, इन मुठभेड़ों में 13 पुलिसकर्मी शहीद हुए। इनमें कानपुर कांड में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मुठभेड़ों के दौरान 894 पुलिस वाले गोली लगने से घायल भी हुए।