विसुंधरी के ही शंकर सिंह चौहान कहते हैं, पंचायत का चुनाव लड़ना, लोहे के चने चबाने जैसा है। कौन कितना पैसा खर्च करता है, इसमें आगे निकलने की होड़ होती है। जनता भी इसका लाभ उठाती है। हम कई बार से देख रहे हैं कि ज्यादातर प्रधानी के चुनाव मुर्गा और दारू पर ही चले जाते हैं। चुनाव लड़ने वाला ज्यादा दिमागदार होता है, वो हमारी कमजोरी को पकड़ लेता है, जो कमजोरी होती है उससे काम चला लेता है।
ऐसा हाल अधिकतर ग्राम पंचायत में मिल जाएगा, जहां प्रत्याशी वादों के साथ दारू और मुर्गे की पार्टियों का इंतजाम करने में लग गए हैं। हालांकि, पिछली बार राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रधान और क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) सदस्य के चुनाव खर्च की सीमा 75,000 और जिला पंचायत सदस्य की खर्च सीमा 1,50,000 रखी थी।
कच्ची शराब के धंधे में तेजी...
पंचायतों में थोक के भाव शराब खरीद कर रखने में प्रत्याशियों को डर रहता है, इसलिए गांव के लोगों को नकद पैसे देकर शराब खरीदने की सलाह भी दी जाती है। गांवों में इन दिनों कच्ची शराब का धंधा भी खूब शुरू हो जाता है। इसी का परिणाम है कि जहरीली शराब से होने वाली मौतों में बाढ़ आ गई है।
दारू सबकी वोट किसी एक को...
प्रतापगढ़ की शहाबपुर ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान प्रभाकर सिंह कहते हैं, दारु पीने वाला व्यक्ति सभी दावेदारों या उम्मीदवारों से शराब लेता है लेकिन वोट उसी को देता है, जिसे देना पहले से तय कर लिया है। जो व्यक्ति दारु और पैसे बांटता है वो पैसे कमाने के लिए चुनाव लड़ रहा है। चुनावों में शराब के चलन के खिलाफ अभियान की जरुरत है। महिलाओं को जाग्रत करने की कोशिश करनी चाहिए। ये काम महिलाएं ही कर पाएंगी, क्योंकि इससे सबसे अधिक नुकसान उन्हीं का होता है। प्रभाकर सिंह की पंचायत को अच्छे कार्यों के लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है, जो एक आदर्श ग्राम पंचायत है।
गांवों में पहुंचने लगे गाड़ियों के काफिले...
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के पदों का चुनाव तो जिला पंचायत सदस्यों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव के बाद होता है। लेकिन नेता अपने समर्थकों के समर्थन में अपने काफिलों के साथ गांवों और कस्बों में घूमने लगे हैं। सोनभद्र के उम्भा गांव में जिला पंचायत के चुनाव के लिए अपनी पत्नी के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे बीजेपी नेता भूपेन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं, हम अपने समर्थकों को अधिक से अधिक जितवाना चाहते हैं।