केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 10,570 करोड़ रुपये कटौती कर दी है। इससे प्रदेश की विकास योजनाओं के लिए आर्थिक समस्या की आशंका बढ़ गई थी। केंद्र ने इस समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय करों में राज्यांश की कटौती की राशि के बराबर अतिरिक्त ऋण लेने की मंजूरी दे दी है। यह अतिरिक्त ऋण राशि स्वीकृत सीमा से अलग होगी। इससे प्रदेश की विकास योजनाएं अपने रफ्तार से आगे बढ़ सकेंगी।
सूत्रों ने बताया कि अनुमान के मुताबिक केंद्रीय करों की वसूली न होने के कारण केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्य सरकार की हिस्सेदारी में 10,570 करोड़ रुपये की कटौती की है। यूपी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध अधिनियम (एफआरबीएम) के अनुसार सरकार जीएसडीपी का 3 प्रतिशत ही ऋण ले सकती है।
ऐसे में कोविड-19 महामारी के दौरान प्रदेश की विकास योजनाओं को गति देने के लिए बड़े आर्थिक संकट की नौबत आ जाती। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य के अधिकारी केंद्र सरकार के संपर्क में थे। इसके नतीजे सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि केंद्रीय करों से राज्य की हिस्सेदारी में जितनी कटौती की गई है, राज्य सरकार उसके बराबर राशि अतिरिक्त ऋण ले सकेगी।
इस अतिरिक्त ऋण पर एफआरबीएम एक्ट का प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यानी यह ऋण जीएसडीपी की तीन प्रतिशत सीमा से अतिरिक्त होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रदेश को एफआरबीएम एक्ट में आवश्यक संशोधन के लिए कहा है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए यूपी राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध संशोधन विधेयक-2020 विधानमंडल के मानसून सत्र में लाने का फैसला किया है।