सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 करने की मांग पर अब तक दो टूक इनकार कर रही सरकार, कर्मचारियों की इस मांग का परीक्षण कराने को तैयार हो गई है। इसके अलावा निजीकरण, आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त कर नियमित नियुक्तियों की व्यवस्था बहाल करने से जुड़ी मांगों पर विचार के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने पर सहमति दे दी है।
जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार कर्मचारियों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में उन कई मांगों पर विचार करने का फैसला किया है जिसे वह सुनने को भी तैयार नहीं होती थी। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने अब वित्त एवं कार्मिक विभाग को इस मांग का परीक्षण करने की संयुक्त रूप से जिम्मेदारी दे दी है।
इसी तरह केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं व विभागों में निजीकरण, आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी से की जाने वाली भर्तियों में मनमानापन, भ्रष्टाचार, कर्मियों का शोषण से जुड़ीं शिकायतें आम रहती हैं। कर्मचारी संगठन इस व्यवस्था में कार्यरत कर्मियों को समायोजित करने, रिक्त पदों के सापेक्ष नियुक्तियां करने व संविदा, आउटसोर्सिंग व अन्य माध्यमों से कार्यरत कार्मिकों को समान कार्य का समान वेतन दिए जाने की मांग करते रहे हैं।
मुख्य सचिव ने इन समस्याओं के हल के लिए अपर मुख्य सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। इसमें वित्त, श्रम व सार्वजनिक उद्यम विभाग के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे।