700 करोड़ रुपये की बंदरबांट वाली पंजीरी के ठेके निरस्त कर दिए गए हैं। तीन महीने के भीतर नए टेंडर कराए जाएंगे। हालांकि तब तक पुरानी फर्मों से ही पंजीरी की आपूर्ति ली जाएगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला किया गया। साल भर बिना टेंडर के पंजीरी बांटने के खेल के बाद विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को अंधेरे में रखकर टेंडर की इजाजत ले ली गई थी।
सचिव, बाल विकास एवं पुष्टाहार अनीता मेश्राम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक साल में 300 दिन पुष्टाहार का वितरण अनिवार्य है। इसलिए नए टेंडर होने तक पहले से आपूर्ति कर रहीं फर्मों से ही वर्ष 2013 की निर्धारित दरों पर आपूर्ति ली जाएगी।
अगर टेंडर प्रक्रिया तीन महीने से पहले पूरी कर ली गई तो पुरानी फर्मों को आपूर्ति के लिए बढ़ाई गई अवधि स्वत: समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि नई टेंडर होने के बाद आपूर्ति ब्लॉक स्तर के बजाय आंगनबाड़ी केंद्रों के स्तर पर होगी। पंजीरी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर जांच के साथ ही प्रमाणपत्र लेने की व्यवस्था भी की गई है।