स्लाटर हाउस पर पाबंदी के साथ गोरक्षा के एजेंडे पर सत्ता संभालने वाली सरकार ने इस बजट में गोवंश की सुरक्षा, संवर्धन और उन्हें बहुपयोगी बनाने की राह पर आगे बढ़कर लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि गाय के नाम पर तमाम आरोप लगने के बावजूद वह एजेंडे से टस से मस नहीं होने वाली।
पशु संजीवनी कार्यक्रम के जरिये दुधारू पशुओं की देखभाल, छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए सभी 16 महानगरों में गोशालाओं को मदद, कान्हा गौशाला, पंचगव्य अर्थात गाय के दूध, गोबर, गोमूत्र से हो सकने वाले उत्पादों के लिए अनुसंधान योजना और पं. दीनदयाल उपाध्याय लघु डेयरी योजना के जरिये भी इस काम को आगे बढ़ाया गया है।
बुंदेलखंड में छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र के सभी सात जिलों में एक-एक हजार गोवंश की क्षमता वाले ‘गोवंश वन्य विहारो’ की स्थापना की घोषणा और धन की व्यवस्था गोवंश को बचाने और किसानों की नाराजगी दूर करने की एक पंथ दो काज कोशिश जैसी है।
प्रदेश की 12 पुरानी जेलों में गौशला बनाने के लिए धन की व्यवस्था करके और गोवंश की रक्षा के साथ उनकी सुरक्षा और संवर्धन की संकल्प पत्र की प्रतिबद्धता प्रमाणित करने के लिए गोकुल पुरस्कार सहित नंद बाबा पुरस्कार की घोषणा भी यही साबित करती है।
अयोध्या में योगी आदित्यनाथ
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पर्यटन और संस्कृति के सहारे हिंदुत्व के सरोकारों का ख्याल रखने का संदेश दिया गया है। हालांकि इनमें कुछ घोषणाएं बीते दिनों में हो चुकी हैं। पर, उन्हें अब बजट में शामिल करके यह बताने की कोशिश की गई है कि सरकार को इस बात का ख्याल है कि चुनाव के दौरान कोई उन पर यह आरोप न लगा सके कि यह भी ‘घोषणा सरकार’ है।
शायद यही वजह रही कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद की घोषणा को आगे बढ़ाते हुए इसके संचालन के लिए बजट में धन की व्यवस्था की गई है तो अयोध्या में दिवाली पर हुए दीपोत्सव को अब लगातार जारी रखकर प्रतिवर्ष मनाने के साथ काशी में प्रतिवर्ष देवोत्थानी एकादशी पर होने वाली देव दीपावली और बरसाना (मथुरा) की होली के उत्सव के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था करके भी एजेंडे को धार दी गई है।
रामायण, ब्रज कृष्ण, बौद्ध, सूफी, बुंदेलखंड और जैन परिपथ के लिए धन की व्यवस्था, नैमिषारण्य व अयोध्या का पर्यटन विकास तथा वृंदावन नगर निगम व नगर पंचायत बरसाना की सीमा को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित करना भी यही साबित करता है। सवाल उठ सकता है कि बुंदेलखंड का भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे से क्या मतलब? ध्यान रखने की बात है कि बुंदेलखंड में ही वह चित्रकूट है जहां वनवास के दिनों में भगवान राम रुके थे। यहीं कामदगिरि पर्वत और मध्यप्रदेश से लगे हिस्से में गुप्त गोदावरी जैसी धार्मिक महत्व की जगह है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चित्रकूट गए थे और मंदाकिनी की आरती शुरू की थी। कैलाश मानसरोवर भवन की स्थापना के लिए धन का आवंटन, प्रयागराज मेला प्राधिकरण व कुंभ मेला के 50 किलोमीटर परिधि में स्थित पर्यटन स्थलों के विकास के रंग से एजेंडे को चटख करने का प्रयास किया गया है।