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यूपी कैबिनेट ने लिए छह अहम फैसले, दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन बनाने को मिली मंजूरी

Wed, 11 Apr 2018 01:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने मंगलवार को कई अहम फैसले किए। इसमें लखीमपुर खीरी में दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन के गठन को मंजूरी देने के साथ ही पीलीभीत और बिजनौर में नए बाघ संरक्षण फाउंडेशन के गठन पर विचार का फैसला किया गया। लोकभवन में कैबिनेट बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि छह प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।

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उन्होंने बताया कि 2007 में केंद्र सरकार की तरफ से दिए गए निर्देश पर योगी सरकार ने दुधवा बाघ संरक्षण फाउंडेशन बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और दुधवा के बगल में रहने वाले आदिवासियों के लिए नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे।

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन की आय पर्यटकों के प्रवेश शुल्क, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से की जाएगी। इसमें वाइल्ड-लाइफ सेंचुरी को लेकर काम करने वाले लोग व एनजीओ सहयोग कर सकेंगे। अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधों के तहत भी इसके लिए धनराशि प्राप्त की जा सकेगी। इस फांउडेशन पर वन मंत्री की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यीय कमेटी नजर रखेगी।
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वन विभाग के फील्ड डायरेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी रोज के कामों पर नजर रखेगी। इसके अलावा कैबिनेट ने प्रदेश में दो अन्य बाघ संरक्षण फाउंडेशन पर विचार करने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत पीलीभीत पूरे जिले को और बिजनौर के निशानगाढ़ा को डवलप करने का प्रस्ताव है।

दूसरा फैसला- पीलीभीत की बंद सहकारी चीनी मिल मझोला को चलाने को हरी झंडी

- फोटो : amar ujala
प्रदेश कैबिनेट ने पीलीभीत में बंद पड़ी किसान कोऑपरेटिव शुगर मिल मझोला को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसे इंटीग्रेटेड शुगर कॉम्पलेक्स के रूप में विकसित कर को-जनरेशन पावर प्लांट व डिस्टलरी के साथ चलाने की योजना है। इस मिल से करीब 10 हजार किसानों को फायदा मिलेगा।

सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि यह चीनी मिल 2010-11 से बंद है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई चर्चा के बाद इसे पीपीपी मॉडल पर चलाने के लिए 30 वर्ष की लीज पर देने का फैसला किया गया है। जमीन किसान कोऑपरेटिव के पास ही रहेगी।

पहले 10 वर्ष 90-90 लाख रुपये प्रतिवर्ष, 11 से 20 वर्ष तक 1.35 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष और 21 से 30 वर्ष की अवधि में 1.80 करोड़ रुपये प्रति वर्ष देना होगा। उन्होंने बताया कि 50 करोड़ की लागत से 10 मेगावॉट का पावर प्लांट और 60 करोड़ रुपये से 30 किलोलीटर प्रतिदिन क्षमता की डिस्टलरी स्थापित की जाएगी।

इसके अलावा 8500 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स होने से किसानों को फायदा होगा। इससे चीनी के दाम घटने-बढ़ने के प्रभाव से निपटा जा सकेगा। मिल के चलाने के लिए निवेशकर्ता का चयन ई-टेंडर के जरिए होगा।

तीसरा फैसला: बलिया में बहुउद्देशीय सभागार को मंजूरी

- फोटो : अमर उजाला
कैबिनेट ने बलिया कलेक्ट्रेट परिसर में 1000 व्यक्तियों की क्षमता के बहुउद्देशीय सभागार की पुनरीक्षित लागत को भी मंजूरी दे दी है। यह सभागार वर्ष 2005 से बन रहा है और कई बार इसकी लागत पुनरीक्षित की जा चुकी है। कैबिनेट ने इसी वर्ष दिसंबर तक भवन को पूरा करने की समयसीमा तय करते हुए लागत को नए सिरे से पुनरीक्षित कर विशिष्टियों के प्रयोग को भी मंजूरी दे दी है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि 2005 में जब इस सभागार को बनाने का फैसला हुआ था तब इसकी लागत 2 करोड़ 32 लाख 76 हजार रुपये थी।

दूसरी बार 2014 में 4.09 करोड़ लागत मंजूर की गई। इसके अधूरे काम को पूरा करने के लिए कैबिनेट ने सभागार की लागत 5.95 करोड़ करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसमें फाल्स सीलिंग, वाल पैनलिंग जैसी विशिष्टियों के प्रयोग पर सहमति दे दी है। उन्होंने बताया कि भवन का काम दिसंबर तक  पूरा कर लिया जाएगा।

चौथा फैसला: दो साल से पहले एक बिजली कंपनी से दूसरे में नहीं जा पाएंगे निदेशक
यूपी पावर कॉर्पोरेशन लि. के पांच विद्युत वितरण निगमों में कार्यरत निदेशक व उससे उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारी एक निगम में काम करते हुए दूसरे निगम में काम के लिए दो वर्ष तक आवेदन नहीं कर पाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कॉर्पोरेशन के साथ पांच विद्युत वितरण कंपनियों-मध्याचंल, पूर्वांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल व केस्को और अन्य कंपनियों में कार्यरत निदेशक वर्तमान में एक कंपनी में कार्य करते समय दूसरे में स्थान रिक्त होने पर आवेदन कर सकते हैं। किसी अधिकारी के अचानक कंपनी छोड़कर जाने से कामकाज प्रभावित होता है।

ऊर्जा विभाग ने बिजली कंपनियों में निदेशक या उनसे ऊपर के पदों पर कार्यरत अधिकारियों को एक कंपनी में कार्य करते समय दो वर्ष तक दूसरी कंपनी के रिक्त पदों पर आवेदन करने पर रोक लगा दी है। हालांकि, जिस कंपनी में कार्यरत हैं यदि वहां कार्यरत पद से वरिष्ठ पद रिक्त हैं तो उसके लिए आवेदन करने की छूट होगी।
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पांचवां फैसला: केंद्र के साथ त्रिपक्षीय करार 15 साल और बढ़ा

प्रदेश कैबिनेट ने केंद्रीय उपक्रमों के बकाया भुगतान के लिए पूर्व के त्रिपक्षीय अनुबंध को 15 वर्ष के लिए और बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अनुबंध का विस्तार एक नवंबर-2016 से मान्य होगा। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के उपक्रमों (पीएसयूज) कोल इंडिया से कोयला, केंद्रीय विद्युत उपक्रमों (एनटीपीसी, एनएचपीसी और पॉवर ग्रिड आदि) से बिजली व भेल आदि उपक्रमों से बिजली घरों के लिए उपकरण आदि लेती है। इसका भुगतान समय से हो सके इसके लिए वित्त मंत्रालय, आरबीआई व यूपी सरकार के बीच 2001 में एक त्रिपक्षीय एमओयू हुआ था।

प्रदेश सरकार इसमें समय से भुगतान की गारंटी देती है। समय से भुगतान न होने पर पेनाल्टी अदा करनी पड़ती है। मंत्री ने बताया कि एमओयू की समय सीमा 2016 में बीत चुकी है। कैबिनेट ने इसे एक नवंबर-2016 से अगले 15 वर्षों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इससे बिजली, कोयला व उसके  उपकरणों की खरीद में आगे कोई अड़चन नहीं आएगी।

छठा फैसला: होमगार्ड में बढे़गा जॉइंट व मंडलीय कमाडेंट का एक-एक पद
कैबिनेट ने होमगार्ड सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए संयुक्त महा समादेष्टा (जॉइंट कमांडेंट) और मंडलीय कमांडेंट का एक-एक पद बढ़ा दिया है। प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि होमगार्ड सेवा नियमावली-1982 में पांचवां संशोधन किया गया है। इसके अंतर्गत जाइंट कमांडेंट के चार पदों को बढ़ाकर पांच और मंडलीय कमांडेंट के 16 पदों को बढ़ाकर 17 कर दिया गया है। दूसरी ओर नगर कमांडेंट के तीन पदों में से एक घटाकर दो कर दिया गया है।
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