यूपी के शहरों की आबोहवा बुरी तरह बिगड़ चुकी है। वायु की
गुणवत्ता पर एमनेस्टी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी में
हवा औसत से चार गुना खराब है। गाजियाबाद, बरेली, इलाहाबाद,
कानपुर जैसे शहरों की स्थिति तो और भी ज्यादा खराब है।
क्लीन एयर प्रोजेक्ट पर काम कर रही एमनेस्टी की रिपोर्ट के
मुताबिक, कुल 20 शहरों में हवा की गुणवत्ता परखी गई। सेंट्रल
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के मानक के अनुसार इन शहरों
की हवा में पीएम-10 का सालाना औसत अधिकतम 60
माइक्रोग्राम प्रति घनमी होना चाहिए था, जो 228 माइक्रोग्राम प्रति
घनमी निकला। ये आंकड़े अक्तूबर 2015 से सितंबर 2016 के
बीच लिए गए।
कहां कितना सालाना औसत पीएम-10
गाजियाबाद 258
बरेली 240
इलाहाबाद 250
कानपुर 201
आगरा 186
लखनऊ 169
वाराणसी 145
सोनभद्र 132
(सभी आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घनमी में)
सर्दी में बढ़ा प्रदूषण
एमनेस्टी के एनालिस्ट जितेंद्र कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2015
से फरवरी 2016 के बीच वायु प्रदूषण अधिकतम रहा। इस बीच
हवा में पीएम-10 की मात्रा 400 माइक्रोग्राम प्रति घनमी तक पहुंच
गई।
इन कारणों ने बिगाड़ी हवा
औद्योगिक केंद्र (26 प्रतिशत)
कॉमर्शियल एरिया (7 प्रतिशत)
वाहन (21 प्रतिशत)
घरेलू ईंधन को जलाया जाना (19 प्रतिशत)
पक्की और कच्ची सड़कें (15 प्रतिशत)
कचरा जलाना (5 प्रतिशत)