भारत में पॉप गीतों की शुरुआत करने वाली ऊषा उथुप का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। एक कार्यक्रम में लखनऊ आईं इस पद्मश्री गायिका ने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम कमाया है।
अब तक देसी और विदेशी मिलाकर 25 भाषाओं में गीत गा चुकी ऊषा खुद को भाग्यशाली मानती हैं।
वह कहती हैं कि इस क्षेत्र के हर बदलाव को उन्होंने करीब से देखा है। फिल्मफेयर अवॉर्ड और पद्मश्री के सम्मान को वह जिंदगी की बड़ी उपलब्धि बताती हैं।
सबसे बड़ा सपना क्या है?
रियलिटी शोज के आने से म्यूजिक इंडस्ट्री में क्या बदलाव देखती हैं?
- हमारे समय में ऐसे शो नहीं हुआ करते थे। ये अच्छा कॉन्सेप्ट है। इससे म्यूजिक इंडस्ट्री और नए कलाकार दोनों को लाभ हो रहा है। इंडस्ट्री को जहां प्रतिभाशाली लोग मिल रहे हैं, वही नए लोगों के लिए इस क्षेत्र में आने का रास्ता खुला है।
आपका सबसे बड़ा सपना क्या है?
- मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट है ‘कश्मीर टू कन्याकुमारी’। यानी देश में जितनी भी भाषाएं बोली जाती हैं उन सभी में गीत गाना चाहती हूं। अब तक भारत की 17 भाषाओं के साथ ही 8 विदेशी भाषाओं में गीत गाए हैं। जब भी किसी नई भाषा में गीत गाने का अवसर मिलता है तो अच्छा महसूस करती हूं।
खुशनसीब हूं कि हर तरह के बदलाव देखे
अब तक म्यूजिक इंडस्ट्री में किस तरह का बदलाव देखती हैं?
- जमीन-आसमान का बदलाव हुआ है। सबसे बड़ा बदलाव है इस क्षेत्र में नई तकनीक का आना, जिसने सब कुछ बदलकर रख दिया है। समय के साथ बदलाव होना जरूरी है।
इस क्षेत्र में रोज कुछ नया हो रहा है जो अच्छी बात है। मैंने जब गाना शुरू किया तब तो टीवी भी नहीं होते थे। खुद को खुशनसीब मानती हूं कि पॉप की शुरुआत से लेकर आज तक के हर बदलाव को देखने का मौका मिला।
चुनना तो हमारे हाथ में है
क्या इन बदलाव के साथ अश्लीलता भी आई है?
- जब भी बदलाव होता है तो अच्छी और बुरी दोनों चीजें होती हैं। वेस्टर्न कल्चर के बढ़ने से कुछ ऐसे बदलाव भी हुए हैं जो अच्छे नहीं, लेकिन यह हमारे ऊपर है कि हम अच्छी चीजों को लें और खराब चीजों को फेंक दें। बाजार में सभी तरह के कपड़े होते हैं लेकिन हम वही पहनते हैं जो पसंद हो।
आज के दौर का फेवरिट गायक कौन है?
- जब ऊषा से यह सवाल किया गया, तो उन्होंने बिना कोई देर किए आशिकी 2 फेम अरिजित सिंह का नाम लिया। उन्होंने कहा कि उसकी आवाज बहुत अच्छी है। सुरों का उसे अच्छा ज्ञान है।
मिलनसार हैं लखनऊ के लोग
लखनऊ में आपको सबसे अच्छा क्या लगता है?
- कई बार लखनऊ आना हुआ है। यहां की सुगंध मुझे सबसे अच्छी लगती है। जब भी यहां आना होता है ‘इत्र’ खरीद कर जरूर ले जाती हूं। इसके अलावा यहां के लोग बहुत अच्छे और मिलनसार हैं। अपने घर जैसा लगता है ये शहर।