उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर को तीन मामलों में दोषी पाया गया है।
उनके खिलाफ बगैर संबद्धता के कॉलेजों में दाखिला करवाने, प्रवेश से संबंधित मामलों में 4 माह बाद भी जवाबी हलफनामा दाखिल न करने, नई संबद्धता देने के लिए अलग वेबसाइट बनाने और अलग खाता खोलने के आरोप हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने 70 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है।
तोमर से इस मामले में नौ जुलाई तक जवाब मांगा गया है।
कई और भी हैं आरोपी
इस पूरे खेल में प्राविधिक शिक्षा विभाग से जुड़े कई बड़े नाम भी शामिल हैं जो तोमर के वरदहस्त रहे।
यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आर के खांडल ने बताया कि यूएस तोमर को 24 मई को रजिस्ट्रार पद के कार्यों से हटाकर उनके खिलाफ जांच करवाने के आदेश दिए गए थे।
करीब महीने भर की जांच के बाद तोमर के खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है।
जांच कमेटी ने तोमर को अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन, गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और उप्र राजकीय कर्मचारी आचरण नियमावली के अंतर्गत कदाचार का भी दोषी पाया है।
तोमर इन मामलों में दोषी
पहला--सत्र 2013-14 में तीन नए संस्थान मथुरा स्थित ईशान कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट, मेरठ स्थित महावीर कॉलेज ऑफ फार्मेसी और गोरखपुर स्थित पूर्वांचल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिजाइन में बिना संबद्धता के ही स्टूडेंट्स को दाखिला दे दिया।
दूसरा--प्रवेश के मामले में रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल करना था लेकिन चार माह बीतने पर भी इसे दाखिल नहीं किया गया।
तीसरा चार्ज--सत्र 2014-15 में कॉलेजों की संबद्धता के लिए तोमर ने गैरकानूनी तरीके से विजया बैंक में खाता खुलवाया। यूपीटीयू की आधिकारिक वेबसाइट से अलग वेबसाइट बनवा ली। इसी वेबसाइट पर ही संबद्धता के आवेदन लिए गए।