लखनऊ। संसद में नारी वंदन बिल (महिला आरक्षण) गिरने के बाद सपा-कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने के लिए बृहस्पतिवार को बुलाए गए विशेष सदन में जमकर हंगामा हुआ। यह हंगामा सदन के अंदर से लेकर बाहर तक चला, जिससे करीब एक घंटे तक माहौल तनावपूर्ण रहा। विपक्ष की गैरमौजूदगी में सपा और कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा पार्षदों ने महापौर के आवास पर अपमानजनक कृत्य करने वाले सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रस्ताव भी रखा।
सदन की कार्रवाई सुबह 11 बजे शुरू होते ही महापौर सुषमा खर्कवाल ने नारी वंदन विधेयक को लेकर प्रस्ताव पढ़ना शुरू किया तो हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस और सपा पार्षदों ने विरोध किया कि जब यह विधेयक 2023 में पारित हो चुका है, तो इस पर चर्चा क्यों। उन्होंने इसे उसी रूप में लागू करने की मांग की। पार्षदों ने निगम में पहले से 33 फीसदी महिला आरक्षण का भी हवाला दिया। इस पर भाजपा पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। महापौर ने अपने आवास पर नाम पट्टिका को चप्पल से पीटने का मामला उठाया और इसे नारी का अपमान बताया। उन्होंने इसे लखनऊ की प्रथम नागरिक और सैनिक की पत्नी पर हमला बताया। सपा पार्षदों ने महापौर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मां का अपमान करने का आरोप लगाया। हंगामे के बीच सपा और कांग्रेस पार्षद सदन का बहिष्कार कर चले गए। महापौर ने दावा किया कि 119 पार्षदों में से 93 ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया।
सदन के बाहर प्रदर्शन
सदन का बहिष्कार करने के बाद कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी और मुकेश सिंह चौहान ने नगर निगम मुख्यालय में धरना दिया। उन्होंने महापौर, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाए। करीब आधा घंटे बाद महापौर के वापस जाने पर कांग्रेस पार्षदों ने उन्हें महिला आरक्षण विधेयक लागू करने की मांग को लेकर एक स्मृति पत्र भी दिया। वहीं, सदन के बाहर सपा पार्षदों ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं का सम्मान नहीं करती और महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में लागू नहीं कर रही है।
सत्तापक्ष और विपक्ष में फूट
विशेष सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में आंतरिक फूट भी दिखाई दी। सत्ता पक्ष के कई पार्षद हंगामा समाप्त होने के बाद सदन में पहुंचे। कुछ महापौर के समर्थन में भी नहीं खड़े हुए। विपक्ष में भी कुछ पुराने पार्षद विपक्ष में होते हुए भी सत्ता पक्ष का साथ दे रहे थे। जानकारों ने बताया कि भाजपा और सपा दोनों में गुटबाजी है, जो इस विरोध और समर्थन में भी स्पष्ट दिखी।
नगर निगम में हंगामा।
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