राजधानी लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के बीच अधिकारों को लेकर चल रही तनातनी के चलते नगर निगम कार्यकारिणी एक और बैठक बेनतीजा रही। बैठक में आरोप-प्रत्यारोप के बीच पार्षदों ने पूर्व की कार्यकारिणी बैठकों में पास हुए प्रस्तावों पर अमल न होने का आरोप लगाते हुए बैठक में धरना दिया और हंगामा किया।
भाजपा पार्षद पृथ्वी गुप्ता और अरुण राय ने बैठक के बीच निगम प्रशासन के खिलाफ धरना दिया। बैठक के बाद महापौर ने नगर निगम अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि पिछले दो साल में कार्यकारिणी में पास किए काफी प्रस्तावों पर अफसरों ने अमल नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण है, बल्कि चुने गए प्रतिनिधियों और लखनऊ की जनता दोनों का अपमान है।
महापौर ने कहा कि सबसे गंभीर लापरवाही पुनरीक्षित बजट के मामले में देखने को मिली है। उनके पास पुनरीक्षित बजट की प्रति पहले एक चपरासी के जरिए भेजी गई। जब उसे लौटा दिया गया तो उसे डाक से भेज दिया गया। यह तरीका महापौर को अपमानित करने वाला है।
बजट को लेकर पहले अफसरों को उनसे चर्चा करनी चाहिए थी। पहले अफसर महापौर के आवास पर जाकर बजट पर चर्चा करते थे। खुद उसकी प्रति देने जाते थे। इस बार ऐसा नहीं किया गया। बजट एक गोपनीय और महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। बजट को लेकर इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।