उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से आयोजित की जाने वाली सीधी भर्ती परीक्षाओं में अब स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएंगे। स्क्रीनिंग परीक्षा और इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर मेरिट बनेगी और अभ्यर्थियों का चयन होगा। यह निर्णय शुक्रवार को हुई आयोग की बैठक में लिया गया। इसके लिए नई नियमावली बनाई जाएगी। आयोग इसका प्रस्ताव शासन को भेजगा।
इन दिनों यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच चल रही है। जांच के दौरान सीबीआई ने कई सीधी भर्ती परीक्षाओं से संबंधित अभिलेख भी जब्त किए हैं और उसे सीधी भर्ती में धांधली के कुछ सुराग भी मिले हैं। वैसे भी सीधी भर्ती को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं, क्योंकि इसमें चयन केवल इंटरव्यू में मिले नंबरों के आधार पर किया जाता है। जिन पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन अधिक आते हैं, वहां आयोग अभ्यर्थियों की छंटनी के लिए लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा कराता है। हालांकि, स्क्रीनिंग परीक्षा में मिले अंक चयन में काम नहीं आते हैं।
स्क्रीनिंग परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया जाता है, लेकिन मेरिट इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर बनती है। आयोग के सचिव जगदीश ने बताया कि पिछले दिनों यूपीपीएससी की एक टीम को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) अध्ययन के लिए भेजा गया था। वहां लागू व्यवस्था के आधार पर आयोग की बैठक में निर्णय लिया गया कि यहां भी सीधी भर्तियों में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक जोड़े जाएंगे।
इसे लागू करने के लिए नई नियमावली तैयार होगी। इसके लिए आयोग की ओर से शासन को संस्तुति भेजी जा रही है। शासन स्तर से नई नियमावली बनने के बाद इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। इससे परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ेगी।
पचास-पचास फीसदी जुड़ेंगे अंक
नई नियमावली लागू होने के बाद जिन पदों पर सीधी भर्ती के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा कराई जाएगी, उनमें स्क्रीनिंग परीक्षा में मिले कुल अंकों के 50 फीसदी और इंटरव्यू में मिले कुल अंकों के 50 फीसदी अंक जोड़कर मेरिट तैयार की जाएगी। उदाहरण के तौर पर स्क्रीनिंग परीक्षा में किसी अभ्यर्थी को 70 अंक और इंटरव्यू में 60 अंक मिलते हैं तो स्क्रीनिंग परीक्षा के 35 और इंटरव्यू 30 अंक जुड़ेंगे और उसे 65 अंक मिलेंगे। इसी तरह प्रत्येक अभ्यर्थी को अंक दिए जाएंगे और इसी आधार पर मेरिट बनेगी।
खत्म होगा सदस्यों का एकाधिकार
सीधी भर्ती में अब तक केवल इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर चयन किया जाता है और आयोग के सदस्य ही इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं। जब स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक जुड़ने लगेंगे तो सदस्यों का एकाधिकार समाप्त हो जाएगा और स्क्रीनिंग परीक्षा में सफल योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में मिलने वाले अंकों पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना होगा।
बड़ी भर्तियों के लिए होती है स्क्रीनिंग परीक्षा
आयोग उन्हीं पदों पर भर्ती के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा कराता है, जिसमें आवेदकों की संख्या हजारों में होती है। सभी को इंटरव्यू में शामिल नहीं किया जा सकता, सो छंटनी के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा होती है। इनमें में जीआईसी प्रवक्ता, राजकीय डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिकल अफसर, दंत चिकित्सा में प्रवक्ता, सहायक सांख्यिकी अधिकारी जैसे पदों पर होनी वाली सीधी भर्तियां शामिल हैं।