जेपी नड्डा और योगी आदित्यनाथ
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लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक बदलाव आया और भाजपा के तमाम बड़े नेता दिल्ली तलब किए जाने लगे। मुख्यमंत्री की बैठकों में कई बड़े मंत्रियों की गैरमौजूदगी को उनकी नेतृत्व से नाराजगी से जोड़ा जाने लगा। विपक्ष ने भी इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के कयासों को बल देने लगे। हालांकि इससे इतर योगी पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे। उपचुनाव वाले जिलों में उनके ताबड़तोड़ दौरों ने सियासी हवा का रुख बदल दिया। नतीजतन, लोकसभा चुनाव के बाद संगठन की समीक्षा बैठकों में शामिल न होने वाले नेता भी अपना रुख बदलने को मजबूर हो गए। इतना ही नहीं, सरकार और संघ के बीच सांमजस्य पर भी काम हुआ जिसका असर उपचुनाव में जमीन पर देखने को मिला।
जीत की गारंटी बने याेगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव, विधान परिषद उपचुनाव, नगर निकाय चुनावों में भाजपा व एनडीए को जीत दिलाई तो अन्य राज्यों में भी भाजपा कार्यकर्ता के रूप में खूब पसीना बहाया। लिहाजा पीएम मोदी के नेतृत्व में कई राज्यों में भाजपा सरकार बनी। कुंदरकी व कटेहरी में भी कमल खिलने से भाजपा हाईकमान का भी योगी पर भरोसा बढ़ा है और उन्हें जीत की गारंटी मान लिया गया है। बता दें कि इस बार निकाय चुनाव में भी भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। मई में विधान परिषद की दो सीटों पर भी भाजपा जीती थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र में भी महायुति गठबंधन ने फिर से सत्ता हासिल की। पीएम के निर्देशन में योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र में 24 प्रत्याशियों के लिए वोट देने की अपील की। इनमें से 22 पर महायुति गठबंधन ने जीत हासिल की है। इससे पहले त्रिपुरा, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में भी योगी ने भाजपा कार्यकर्ता के रूप में चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया, जो कमल खिलाने में मददगार साबित हुआ।
गोला गोकर्णनाथ- अमन गिरि
छानबे- रिंकी कोल (अपना दल एस)
रामपुर- आकाश सक्सेना
स्वार टांडा- शफीक अंसारी (अपना दल एस)
ददरौल-अरविंद सिंह
लखनऊ पूर्वी-ओपी श्रीवास्तव
कुंदरकी- रामवीर सिंह
गाजियाबाद- संजीव शर्मा
फूलपुर-दीपक पटेल
मझवा-सुचिस्मिता मौर्य
कटेहरी धर्मराज निषाद
खैर- सुरेंद्र दिलेर
मीरापुर- मिथिलेश पाल (रालोद)