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यूपी: भाजपा की जीत से ताकतकर बनकर उभरे योगी, संगठन में भी आई ताकत, 30 मंत्रियों के साथ इस योजना पर किया था काम

Mon, 25 Nov 2024 06:48 AM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ

सार

BJP victory in by-elections: यूपी के उपचुनावों में नौ में से सात सीटें जीतने वाले योगी आदित्यनाथ ताकतवर बनकर उभरे हैं। उनकी जीत से संगठन में चल रही गुटबाजी की बातों को भी विराम मिलेगा। 
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यूपी चुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 उपचुनाव में मिली जीत ने भारतीय जनता पार्टी में बीते कई महीनों से चल रही अंदरूनी भितरघात पर लगाम कस दी है। लोकसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर ही योगी के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले नेताओं को इस जीत ने निरुत्तर कर दिया है। सिर्फ योगी ही नहीं, इस जीत से भाजपा संगठन भी ज्यादा शक्तिशाली बनकर उभरा है। संगठन में बदलाव के कयासों पर भी इस जीत की वजह से विराम लग सकता है।

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बता दें कि विधानसभा की नौ सीटों पर उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाली थी। साथ ही, 30 मंत्रियों को भी मोर्चे पर तैनात किया था। संगठन के विस्तार के लिए सदस्यता अभियान उपचुनाव में जीत की बड़ी वजह बनकर उभरा। इसने बड़े नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं को एक सूत्र में पिराेने का काम किया, जिसका असर उपचुनाव में देखने को मिला है।

पार्टी द्वारा उपचुनाव में ''बंटेंंगे तो कटेंगे'' और ''एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे'' नारों का इस्तेमाल मुफीद साबित हुआ। करीब डेढ़ वर्ष बाद प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इन नारों को तवज्जो मिलनी तय है, जो वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने का काम करेंगे। खासकर विपक्ष द्वारा चुनाव को जातियों की गणित में उलझाने का फॉर्मूले की काट भाजपा इनके जरिए करेगी।

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दिल्ली तक लगाई दौड़

जेपी नड्डा और योगी आदित्यनाथ - फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम में अचानक बदलाव आया और भाजपा के तमाम बड़े नेता दिल्ली तलब किए जाने लगे। मुख्यमंत्री की बैठकों में कई बड़े मंत्रियों की गैरमौजूदगी को उनकी नेतृत्व से नाराजगी से जोड़ा जाने लगा। विपक्ष ने भी इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के कयासों को बल देने लगे। हालांकि इससे इतर योगी पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे। उपचुनाव वाले जिलों में उनके ताबड़तोड़ दौरों ने सियासी हवा का रुख बदल दिया। नतीजतन, लोकसभा चुनाव के बाद संगठन की समीक्षा बैठकों में शामिल न होने वाले नेता भी अपना रुख बदलने को मजबूर हो गए। इतना ही नहीं, सरकार और संघ के बीच सांमजस्य पर भी काम हुआ जिसका असर उपचुनाव में जमीन पर देखने को मिला।

जीत की गारंटी बने याेगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव, उपचुनाव, विधान परिषद उपचुनाव, नगर निकाय चुनावों में भाजपा व एनडीए को जीत दिलाई तो अन्य राज्यों में भी भाजपा कार्यकर्ता के रूप में खूब पसीना बहाया। लिहाजा पीएम मोदी के नेतृत्व में कई राज्यों में भाजपा सरकार बनी। कुंदरकी व कटेहरी में भी कमल खिलने से भाजपा हाईकमान का भी योगी पर भरोसा बढ़ा है और उन्हें जीत की गारंटी मान लिया गया है। बता दें कि इस बार निकाय चुनाव में भी भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। मई में विधान परिषद की दो सीटों पर भी भाजपा जीती थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र में भी महायुति गठबंधन ने फिर से सत्ता हासिल की। पीएम के निर्देशन में योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र में 24 प्रत्याशियों के लिए वोट देने की अपील की। इनमें से 22 पर महायुति गठबंधन ने जीत हासिल की है। इससे पहले त्रिपुरा, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में भी योगी ने भाजपा कार्यकर्ता के रूप में चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया, जो कमल खिलाने में मददगार साबित हुआ।
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अब तक हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा व सहयोगी दलों की जीत

गोला गोकर्णनाथ- अमन गिरि
छानबे- रिंकी कोल (अपना दल एस)
रामपुर- आकाश सक्सेना
स्वार टांडा- शफीक अंसारी (अपना दल एस)
ददरौल-अरविंद सिंह
लखनऊ पूर्वी-ओपी श्रीवास्तव
कुंदरकी- रामवीर सिंह
गाजियाबाद- संजीव शर्मा
फूलपुर-दीपक पटेल
मझवा-सुचिस्मिता मौर्य
कटेहरी धर्मराज निषाद
खैर- सुरेंद्र दिलेर
मीरापुर- मिथिलेश पाल (रालोद)
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