गलत वसूली का आकलन
अप्रैल 2025 से जून 2026 तक अपनाई गई गणना पद्धति पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। यह नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। इस अवधि में उपभोक्ताओं से लगभग 2801 करोड़ रुपये की वसूली की गई। उन्हें केवल 684 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यदि आयोग के आदेश के अनुरूप पुनर्गणना की जाए तो उपभोक्ताओं के पक्ष में लगभग 2000 करोड़ रुपये या अधिक की राशि निकल सकती है।
परिषद की प्रमुख मांगें
परिषद ने संपूर्ण 14 माह की एफपीपीसीए गणना का विशेष ऑडिट मांगा है। वास्तविक देयता की पुनर्गणना भी इसकी मांगों में शामिल है। माहवार वसूली और समायोजन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश देने को कहा गया है। अतिरिक्त वसूली को उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजन के माध्यम से वापस करने की मांग है। भविष्य में ऐसी त्रुटियां रोकने के लिए सख्त नियामकीय व्यवस्था भी चाही गई है।