तार्किक कारण न बताने पर हाजिर होना पड़ेगा
कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामे के माध्यम से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में अस्तित्वहीन प्रावधान के तहत प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया गया। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी कोई तार्किक कारण नहीं बता सके तो उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा। इसके बाद कोर्ट अवमानना की कार्यवाही पर विचार करेगी।
पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के अंतर्गत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।
25 और 26 मई 2026 के जिन आदेशों के आधार पर सरकार ने कार्यकाल खत्म होने के बावजूद प्रधानों को ग्राम पंचायत के कार्य संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है, वह प्रेम लाल पटेल के मामले में पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश से असांविधानिक घोषित हो चुके हैं।
सरकार बोली-ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार
राज्य सरकार की ओर से अपर स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया गया है। आयोग जिलों में जाकर आबादी का आंकड़ा जुटाएगा और उसी आधार पर आरक्षण तय होगा। यह प्रक्रिया पूरी करने में समय लग रहा है।
25 व 26 मई को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश
इन आदेशों के तहत सरकार ने मौजूदा 57,694 ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें चुनाव होने तक मौजूदा प्रधान नीतिगत मामलों को छोड़कर गांव में सफाई, पेयजल, मनरेगा, सड़क मरम्मत और अन्य जरूरी विकास कार्य संचालित करते रहेंगे।
हालांकि, उन्हें कोई भी कार्य कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिये जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। जबकि, पहले ग्राम पंचायत का कार्यकाल खत्म होने के बाद यह जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी(पंचायत) निभाया करते थे।
26 मई को पूरा हो चुका ग्राम पंचायतों का कार्यकाल
प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। जबकि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का 11 जुलाई को खत्म होगा।