आदेश के मुताबिक ग्राम प्रधानों का मंगलवार को कार्यकाल समाप्त होने के बाद बुधवार से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासन के रूप में रूटीन कार्यों (सामान्य) का निवर्हन किए जाने के लिए नामित करने के लिए डीएम को प्राधिकृत किया गया है। प्रशासक द्वारा कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लिया जाएगा। अत्यावश्यक एवं विशेष परिस्थितियों में नीति विषयक निर्णय संबंधी प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिये डीएम के समक्ष प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
प्रदेश में ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के निर्वाचन का कार्यकाल क्रमशः 26 मई, 19 जुलाई और 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इस तरह से जुलाई में क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में प्रशासक बैठाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासक बैठाए जाने की खबर अमर उजाला ने 6 अप्रैल के अंक में ही प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
राज्य सरकार द्वारा गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी की आबादी के बारे में जानकारी लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या का प्रतिशत 27 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद उस ब्लॉक में ग्राम प्रधान के पद 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षित नहीं हो सकते। हां, अगर यह प्रतिशत उस ब्लॉक में 27 प्रतिशत से कम है, तो उसी अनुपात में पद आरक्षित होंगे। अलबत्ता, प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत) में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 प्रतिशत रखना अनिवार्य है। आयोग को आरक्षण की इस प्रक्रिया को पूरा करने में अभी समय लगेगा।