आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ का असर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश पर रहेगा। मौसम तो 30 मार्च से ही बदलेगा, पर लखनऊ में बदलाव 31 से दिखने लगेंगे।
लखनऊ में एक बार फिर मौसमी उठापटक के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि एक-दो अप्रैल को लखनऊ में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि के आसार हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान हो जाएगा।
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आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ का असर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश पर रहेगा। मौसम तो 30 मार्च से ही बदलेगा, पर लखनऊ में बदलाव 31 से दिखने लगेंगे। वहीं, मौसम विशेषज्ञ एचआर रंजन के मुताबिक, लखनऊ में एक और दो अप्रैल को तेज बारिश संग कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना है।
...तो पशुओं के खाने योग्य भूसा भी नहीं बचेगा
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि एक सप्ताह पहले तेज बरसात, आंधी-तूफान व ओलावृष्टि से किसानों को काफी नुकसान हुआ था। मौसम विभाग के पूर्वानुमान सच होते हैं तो आम तो चौपट होगा ही, हाल ही में बोई गईं मूंग, उड़द, मक्का एवं सफेद तिल फसलें भी प्रभावित होंगी। किसानों की अगेती गेहूं की फसल पिछले सप्ताह की बारिश में गिर गई थी। किसान किसी तरह उसे बटोरने में जुटे हैं। बारिश से गिरा पछेती गेहूं जमीन से उठ रहा है। अब मौसम खराब होता है तो अगेती व पछेती दोनों गेहूं पूरी तरह सड़ जाएगा और पशुओं के खाने योग्य भूसा भी नहीं बचेगा।
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सावधानी बरत कर कम कर सकते हैं नुकसान
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि अगेती गेहूं की कटाई प्रारंभ कर दी है तो उसे बांधकर टिन शेड के नीचे स्टॉक कर लें। पछेती गेहूं की फसल में जल निकासी का उचित प्रबंध करें। मचान वाली सब्जियों के मचान मजबूत रस्सी से बांधकर रखें।