फसलों के यह पखवाड़ा बेहद खास है। यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों पर आफत आ सकती है। चूंकि 63 जिलों में इस माह अब तक बेहद कम बारिश हुई है और धान जैसी फसल को बारिश की बेहद जरूरत है।
इस साल मौसम ने कई रंग दिखाए। पहले सूखा रहा। किसानों ने देर से धान रोपा पर वह भी सूख गया तो फिर से रोपाई करनी पड़ी। फिर खूब बारिश हुई। बाद में हुई बारिश ने फसलों को जीवनदान दिया। हालांकि इस बारिश से कई जिलों में बाढ़ आ गई। अब मौसम ठीक रहा है लेकिन अगले अगले 15 दिन फसलों के लिए बेहद खास है। खास तौर से धान की फसल के लिए इस पखवाड़े में बारिश बेहद जरूरी है।
उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक अधिकारी डा. विनोद कुमार तिवारी कहते हैं कि नहरों आदि से सिंचाई हो रही है लेकिन बारिश बेहद जरूरी है। चूंकि इस समय खरीफ की फसल को पानी की जरूरत है। वैसे भी धान और गन्ने को ज्यादा पानी चाहिए। बारिश से ही सही तरीके से पानी की पूर्ति हो पाती है। हालांकि इसके लेकर बुधवार को क्राप वेदर ग्रुप भी बैठक का आयोजन कर रहा है ताकि मौसम के हिसाब से किसानों को इस बाबत सलाह दी जा सके।
केवल एक जिले में झमाझम बारिश
केवल गोरखपुर जिला ऐसा है जहां सामान्य के मुकाबले 92 प्रतिशत बारिश हुई है। सिद्धार्थनगर में 76 प्रतिशत बारिश हुई है। 7 जिलों में सामान्य बारिश हुई है। 06 जिलों में न्यून जबकि 11 जिलों में अति न्यून बारिश हुई। 46 जिले ऐसे हैं जहां अल्प वर्षा वर्षा हुई है। इन जिलों में ज्यादा चिंता है और यहां बारिश की बेहद दरकार है।
आज से आठ अगस्त तक बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने आठ अगस्त तक विभिन्न जिलों में बारिश एवं वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदासनगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, आगरा, फिरोजाबाद, औरेया, इटावा, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर में मेघ गर्जन, वज्रपात एवं भारी बारिश की आशंका है।