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UP: विकासनगर अग्निकांड, हाईकोर्ट ने पूछा- 20 साल से पीडब्ल्यूडी की जमीन पर अतिक्रमण कर कैसे बस गए लोग

Fri, 17 Apr 2026 08:48 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

हाईकोर्ट ने विकासनगर अग्निकांड पीड़ितों को भोजन, चिकित्सा और बुनियादी सुविधाएं देने का आदेश दिया। कोर्ट ने पूछा कि पीडब्ल्यूडी की जमीन पर 20 साल से 1455 लोग कैसे बस गए। अधिकारियों से जवाब तलब कर 30 मई तक रिपोर्ट मांगी गई है।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के विकासनगर स्थित बस्ती में 15 अप्रैल को हुए अग्निकांड के पीड़ितों को बुनियादी सुविधाएं देने समेत भोजन व चिकित्सा के इंतजाम करने का आदेश संबंधित अफसरों को दिया है।  कोर्ट ने अग्निकांड मामले में दाखिल जनहित याचिका में पीडब्ल्यूडी, प्रदेश के राहत आयुक्त को पक्षकार बनाने के निर्देश देकर जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम, मुख्य अग्निशमन अधिकारी को 30 मई तक ब्यौरे के साथ जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने सरकारी अफसरों से पूछा कि आखिर 20 साल से पीडब्ल्यूडी की चार बीघा जमीन पर कैसे 1455 लोग अतिक्रमण करके बस गए? यह भी पूछा कि कैसे इन्हें बिजली, कुकिंग गैस के कनेक्शन किन कंपनियों के मिले और अबतक सरकारी अमला क्यों सोता रहा। कहा, अदालत इसकी जांच करवाने पर विचार करेगी। साथ ही निर्देश दिया कि अफसर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण न होने पाए।

ऐसे में उन्हें जल्द सरकारी मदद मुहैया कराई जाए

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश अनुराग त्रिपाठी की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में अग्निकांड के पीड़ितों का समुचित पुनर्वास समेत उनकी चिकित्सा, राशन देने और अस्थाई निवास के इंतजाम करने की मांग की गई है। याची का कहना था कि वहां के लोगों का सबकुछ जल गया है, ऐसे में उन्हें जल्द सरकारी मदद मुहैया कराई जाए। 

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही पेश हुए। सरकार के मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि पीड़ितों को भोजन के पैकेट दिए जा रहे हैं एवं चिकित्सकीय मदद के लिए तत्काल एंबुलेंस भेजी गईं। वहां अस्थाई चिकित्सा शिविर भी लगाया गया और रैन बसेरा भी बनाया गया है। 

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कहा कि सरकार पीड़ितों की हर संभव मदद कर रही है। घटना में मृत दो बच्चों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा भी दिए जाने की जानकारी दी। नगर निगम के अधिवक्ता ने कहा की वहां चल शौचालयों की व्यवस्था की गई और सफाई के भी इंतजाम किए गए हैं। 

कोर्ट को बताया गया कि वहां की चार बीघा जमीन, जहां अतिक्रमण करके स्लम बस्ती बनी, पीडब्ल्यू डी की है। वहां 1455 लोग रह रहे थे। कोर्ट ने आदेश देकर मामले के पक्षकारों से ब्यौरे के साथ जवाब तलब करके अगली सुनवाई 30 मई को तय की है।

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