सपा विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सोमवार को पैदल मार्च किया। पुलिस ने रोका तो प्रदर्शन किया। सड़क पर धरना देने बैठ गए। विधानसभा नहीं पहुंच पाने पर सड़क पर ही छद्म विधानसभा लगाई और वंदेमातरम के साथ गोला विधायक को श्रद्धांजलि दी। आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। विपक्ष को विरोध दर्ज कराने से रोक रही है।
सपा ने सोमवार को पार्टी कार्यालय से विधानसभा तक पैदल मार्च कर एलान किया था। सुबह करीब नौ बजे से पार्टी कार्यालय पर विधायकों केआने का सिलसिला शुरू हुआ। एक तरफ विधायक पार्टी कार्यालय में जा रहे थे तो दूसरी तरफ कार्यालय से लेकर पूरे विक्रमादित्य मार्ग को छावनी बना दिया गया। बल्लियां लगाकर बैरिकेडिंग की गई। करीब 10 बजे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में हाथ में सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए विधायक आगे बढ़े।
विधायकों के हाथ में बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं के शोषण, कानून व्यवस्था की बदहाली, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र की दुर्व्यवस्था, बिजली संकट, नौजवानों के साथ हो रहे अन्याय, किसानों की समस्याओं और समाजवादी पार्टी नेताओं पर लगाए जा रहे फर्जी मुकदमों के विरोध में लिखी तख्तियां थीं। वे गौतमपल्ली थाने के पास पहुंचे तो पुलिस ने रोक लिया। पुलिस ने जुलूस के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से वीवीआईपी गेस्ट हाउस होते हुए विधानसभा जाने की बात कही, जबकि सपाइयों का कहना था कि उन्होंने राजभवन के सामने से होते हुए विधान सभा के गेट नंबर एक से प्रवेश करने की अनुमति ली है। इस बात को लेकर सपा और पुलिस कर्मियों में तीखी झड़प हुई।
विवाद इतना बढ़ा कि धक्का मुक्की की नौबत आ गई। पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगा सपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। सदन नहीं पहुंच पाने पर उन्होंने धरना स्थल पर ही छद्म विधानसभा लगाई और गोला गोकर्णनाथ के विधायक अरविंद गिरी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्टी कार्यालय लौट गए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय, रविदास मेहरोत्रा, ओम प्रकाश सिंह, स्वामी ओमवेश, नफीस अहमद, रागिनी सोनकर, पंकज पटेल सहित अन्य सभी विधायक मौजूद रहे।
पहले भी सपा लगा चुकी है छद्म विधानसभा
सियासी जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी इससे पहले 2006 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में छद्म विधानसभा लगा चुकी है। उस वक्त भी सरकार का विरोध किया गया था। सोमवार को भी गौतमपल्ली थाने के सामने छद्म विधानसभा का आयोजन किया गया। सड़क पर सदन की कार्यवाही की शुरूआत अखिलेश यादव द्वारा वंदे मातरम गीत के गायन के साथ हुई, जिसे सभी विधायकों ने दुहराया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने स्पीकर की भूमिका निभाई। विधायक अरविंद गिरि के निधन पर शोक प्रस्ताव रखकर विधायकों ने दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद विधानसभा की कार्रवाई खत्म हो गई।
लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहाकि भाजपा सरकार ने लोकतंत्र की हत्या की है। सदन की कार्यवाही में शामिल होना विधायकों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। लोकतंत्र में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि सरकार भारी फोर्स लगाकर विधायकों को कार्यवाही में शामिल न होने दें। भाजपा सरकार इससे साबित कर रही है कि वह जनाक्रोश से डरकर कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। सत्ता जितनी कमजोर होती है, दमन उतना ही अधिक बढ़ता है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार क्यों विपक्ष का सामना नहीं कर पा रही है? सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एलान किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी सदन और सड़क का रास्ता अपनाएगी। भाजपा सरकार की गलत नीतियों का विरोध करेगी। किसानों, नौजवानों के हक के लिए निरंतर आंदोलन चलाएगी।