पांच जिलों से जुड़ा है एक्सप्रेसवे
इस एक्सप्रेसवे की मदद से लखनऊ के अलावा सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, सुल्तानपुर के लोगों को भी कानपुर पहुंचना आसान होगा। इन जिलों से लखनऊ आने पर लोग आउटर रिंग रोड के जरिये बनी पहुंचेंगे। यहां आउटर रिंग रोड से उतरते ही सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ जाएंगे, जिससे जाम से भी नहीं जूझना पड़ेगा। लखनऊ के लोग शहीद पथ से कानपुर रोड आने वाली एलिवेटेड रोड से बनी पहुंचेंगे। फिर यहां से सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ जाएंगे।
वर्ष 2028 तक तैयार हो जाएगी कानपुर रिंग रोड
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को स्कूटर इंडिया से बनी और बनी से शुक्लागंज (उन्नाव) के बीच दो चरणों में बनाया गया है। यह शुक्लागंज में उतरेगा, जहां से गंगापुल पार करते हुए जाजमऊ जाना होगा। यहां नेशनल हाईवे व एक्सप्रेसवे के वाहन एक ही मार्ग से गुजरेंगे।
फिर फ्लाईओवर से यात्री शहर के बाहर निकल सकेंगे। वर्ष 2028 तक कानपुर रिंग रोड तैयार हो जाएगी। इसके बाद लखनऊ आउटर रिंग रोड से एक्सप्रेसवे होते हुए कानपुर रिंग रोड तक यात्री पहुंच सकेंगे।
घायलों को 15 मिनट में मिलेगी मदद
परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे पर कोई हादसा होने पर अधिकतम 15 मिनट में टीमें मदद के लिए पहुंच जाएंगी। 120 किमी से ज्यादा की रफ्तार से वाहन चलाने वालों के चालान के लिए एटीएमएस लगाए गए हैं।
पूरा एक्सप्रेसवे सीसीटीवी कैमरों की जद में
नकुल वर्मा ने बताया कि पूरा एक्सप्रेसवे सीसीटीवी कैमरों की जद में रहेगा। इसके लिए 63 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा 16 वीडियो डिटेक्शन इंसिडेंट सिस्टम की भी व्यवस्था की गई है, जो हादसा होने पर तत्काल कंट्रोल रूम को सूचित करेगा। इसके अलावा कंट्रोल सेंटर से पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखी जाएगी।