इसलिए इस निधि का प्रावधान किया गया
इसका उपयोग लिफ्ट बदलने, मोटर की मरम्मत, बाहरी रंग-रोगन, पंप, विद्युत व्यवस्था व अन्य साझा परिसंपत्तियों के रखरखाव और पूंजीगत कार्यों के लिए किया जाता है। नियमित मासिक मेंटेनेंस शुल्क से ऐसे बड़े खर्च पूरे नहीं हो पाते, इसलिए इस निधि का प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था के अनुसार आईएफएमएस की राशि निर्धारित बैंक में अलग खाते में जमा करनी होगी। इसका उपयोग किसी अन्य परियोजना या बिल्डर के सामान्य कारोबारी खर्चों में नहीं किया जा सकेगा। आरडब्ल्यूए या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के गठन के बाद पूरी राशि और उस पर अर्जित ब्याज संबंधित संस्था को सौंपना होगा। इसके बाद इस कोष का संचालन आरडब्ल्यूए करेगी और बिल्डर की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि अब तक कई परियोजनाओं में बिल्डर खरीदारों से आईएफएमएस की राशि वसूलने के बावजूद आरडब्ल्यूए के गठन के बाद भी उसे पूरी तरह हस्तांतरित नहीं करते थे। इससे लिफ्ट, पंप, सुरक्षा व्यवस्था व अन्य साझा सुविधाओं के रखरखाव को लेकर विवाद पैदा होते थे और खरीदारों को अतिरिक्त चंदा जुटाना पड़ता था। नई व्यवस्था से घर खरीदारों के हित सुरक्षित होंगे, सोसायटी प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और रखरखाव कार्यों के लिए धन की कमी नहीं रहेगी।
रेरा में स्वैच्छिक पंजीकरण का बढ़ा चलन, संपत्तियों को मिल रहा बेहतर मूल्य
उत्तर प्रदेश में ऐसी आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की संख्या बढ़ रही है, जो कानूनी रूप से रेरा के दायरे में नहीं आतीं, फिर भी स्वैच्छिक रूप से पंजीकरण करा रही हैं। इसकी वजह खरीदारों का बढ़ता भरोसा, बैंकों से ऋण मिलने में आसानी और संपत्तियों का बेहतर बाजार मूल्य है। रेरा अधिनियम के अनुसार आठ या अधिक इकाइयों वाली अथवा 500 वर्गमीटर से बड़े भूखंड पर विकसित परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य है।
जिन मॉल या व्यावसायिक परिसरों में स्वामित्व का हस्तांतरण नहीं होता, वे रेरा के दायरे से बाहर हैं। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों की परियोजनाओं पर रेरा लागू होता है जबकि टाउन एरिया, नगर निगम और जिला पंचायत क्षेत्रों के कई निर्माण कार्य अनिवार्य श्रेणी में नहीं आते।
इसके बावजूद इन क्षेत्रों के बिल्डर स्वैच्छिक पंजीकरण करा रहे हैं। खरीदार रेरा पंजीकरण संख्या पूछते हैं और बैंक भी बिना पंजीकरण वाली परियोजनाओं में गृह ऋण देने से बचते हैं। रेरा पंजीकरण के बाद परियोजनाओं का बाजार मूल्य भी बिना पंजीकरण वाली संपत्तियों की तुलना में करीब डेढ़ गुना तक अधिक मिल रहा है।