उत्तर प्रदेश में लोन वितरण को लेकर बैंकिंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सितंबर 2025 तिमाही की समीक्षा में सामने आया है कि प्रदेश के 6 जिलों में सीडी रेशियो (ऋण-जमा अनुपात) 40 प्रतिशत से भी कम बना हुआ है। इनमें उन्नाव की स्थिति सबसे खराब है।
उप-समिति ने निर्देश दिए हैं कि 40 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो वाले जिलों में हर दो महीने में जिला स्तरीय उप-समिति की बैठक अनिवार्य रूप से की जाए और उसकी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर साझा की जाए।
साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले की वास्तविक क्षमता के अनुसार नया एक्शन प्लान तैयार करने और बैंकों को सेक्टरवार लक्ष्य देने पर जोर दिया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के ऋण आंकड़े शामिल करने, बाहरी ऋण का सही लेखा-जोखा रखने और शाखा स्तर पर निगरानी बढ़ाने के सुझाव दिए हैं।