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UP: फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार, नकली वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन रिजल्ट दिखाकर करते थे ठगी

Thu, 26 Mar 2026 04:25 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

लखनऊ में एसटीएफ ने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास बड़ी संख्या में नकली मार्कशीट, मोहर और उपकरण मिले। 
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दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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एसटीएफ ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से सैकड़ों फर्जी प्रमाण पत्र भी बरामद हुए हैं। एसटीएफ सीओ सुधांशु शेखर ने बताया कि आजमगढ़ निवासी शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा उर्फ शनि और मनीष कुमार राय की गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तारी भी आजमगढ़ के बरदह इलाके से की गई। आरोपियों के पास से 217 फर्जी मार्कशीट, सर्टिफिकेट, रजिस्ट्रेशन व माइग्रेशन प्रमाणपत्र बरामद हुए हैं। 

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इसके अलावा 42 फर्जी मोहर, पांच सीपीयू, दो पेन ड्राइव, 14 मोबाइल फोन, 10 रजिस्टर और एक यूपीआई क्यूआर स्कैनर भी मिला है। पूछताछ में मुख्य आरोपी शशि प्रकाश राय ने बताया कि उसने दिल्ली से बीएससी की पढ़ाई की है और लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय है। वर्ष 2022 में जौनपुर में कॉल सेंटर खोलकर सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद मनीष कुमार राय फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।

जांच में हुआ ये खुलासा 

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इन वेबसाइटों पर कूटरचित मार्कशीट का रिजल्ट अपलोड किया जाता था, जिससे लोग रोल नंबर डालकर उसे असली समझ लेते थे।

पूछताछ में मुख्य आरोपी शशि प्रकाश राय ने बताया कि उसने दिल्ली से बीएससी की पढ़ाई की है और लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय है। वर्ष 2022 में जौनपुर में कॉल सेंटर खोलकर सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद मनीष कुमार राय फर्जी दस्तावेज तैयार करता था।

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गिरोह प्रति दस्तावेज 15 से 20 हजार रुपये तक वसूलता था और तैयार प्रमाणपत्र कुरियर के जरिए भेजे जाते थे। आरोपियों ने अब तक 6 से 7 हजार से अधिक फर्जी दस्तावेज तैयार करने की बात कबूल की है। इस मामले में प्रयागराज के साइबर थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

 

 

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