देश की 6.88 प्रतिशत भूमि पर उत्तर प्रदेश है फिर भी वह देश का 13 प्रतिशत कृषि उत्पादन कर रहा है। अपने इस योगदान के साथ यूपी देश के कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ा योगदान करने वाला प्रदेश बनकर उभरा है।
यह जानकारी एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया के वर्ष 2013-14 के लिए किए गए अध्ययन में सामने आई है। एसोचैम ने इसे शुक्रवार को जारी किया।
इस अध्ययन ‘स्टेट्स इमर्जेंस: अ कंपेरेटिव एनालिसिस ऑफ ग्रोथ एंड डवलपमेंट’ के मुताबिक उत्तर प्रदेश की कुल जीएसडीपी (ग्रॉस स्टेट डॉमेस्टिक प्रोडक्टशन) में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र 22 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। हालांकि कृषि की सकल वार्षिक वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रही, जो देश के श्रेष्ठ 20 राज्यों में यूपी को 15वें स्थान पर रखती है।
एसोचैम की इकोनॉमिक रिसर्च ब्यूरो विंग के इस अध्ययन पर एसोचैम के सचिव डीएस रावत ने कहा कि प्रदेश को औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने के लिए सुधारवादी कदम उठाने होंगे।
प्रमुख कृषि प्रदेश होने के नाते यूपी कृषि क्षेत्र में निवेश और विकास की बड़ी संभावना रखता है। सरकार को उत्पादों के भंडारण, वितरण, सिंचाई व्यवस्था और खुदरा व थोक खरीद जैसे क्षेत्रों में सुधार करने होंगे।
यूपी के लिए ये दिए गए सुझाव
- किसानों और उपभोक्ता बाजार के बीच सीधा जुड़ाव कायम हो। जिससे किसानों को ज्यादा फायदा मिले और बिचौलिए खत्म हों।
- पुराना मंडी सिस्टम खत्म कर प्रतियोगिता आधारित सप्लाई चेन बने।
- मानसून, फसल की दरें व अन्य सूचनाएं किसानों तक समय पर पहुंचाने के लिए सिस्टम विकसित हो।
- किसानी को प्रोत्साहित किया जाए, ट्रेड फेयर हों, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आधुनिक उपकरणों और बाजार की जानकारी पा सकें।
- एकल फसल पर निर्भरता कम करने के लिए नई अनुकूल फसलें किसानों तक पहुंचाई जाएं।
- बड़े स्तर पर कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग लाई जाए, जिससे उत्पादन बढ़े।
- बेहतर बीज, उपकरण, खाद किसानों को दिलाए जाएं और सिंचाई के दौरान जल संरक्षण की तकनीक उन्हें समझाई जाएं।
- फसल बीमा योजना सरकार द्वारा चलाई जाए, जिससे किसानों को राहत मिले।