संजय गांधी पीजीआई में ट्रॉमा, आपदा या फिर अन्य किसी आपात काल से निपटने के लिए विशेषज्ञ इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर तैयार किए जाएंगे।
इन जीवन दूतों को नियुक्ति करने के लिए शासन से 120 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए गए हैं।
ये कवायद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। जिसमें देश भर के चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोलना अनिवार्य कर दिया गया है।
एम्स दिल्ली में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग चल रहा है जबकि, पीजीआई चंडीगढ़ और एसजीपीजीआई में विभाग शुरू करने के लिए कवायद चल रही है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने आपात कालीन चिकित्सा सेवाओं को सुधारने के लिए विशेषज्ञ इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर तैयार करने की योजना बनाई थी।
इसी के तहत सभी चिकित्सा संस्थानों में पांच साल के अंदर इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोलने के निर्देश जारी किए गए थे।
इसमें इलाज के साथ ही मेडिकल स्टूडेंट को इमरजेंसी मेडिसिन में विशेषज्ञता देने की योजना भी बनाई गई। जिससे भविष्य में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर तैयार हो सकें।
ये इमरजेंसी ऑफिसर सांप के जहर से मर रहे मरीज हो या फिर दिल के दौरे के कारण आने वाले मरीज, सभी का इलाज करने में सक्षम में होंगे।
इन विशेषज्ञों को ऐसे तैयार किया जाएगा कि वे सिर की चोट, इलेक्ट्रिक बर्न, अस्थमा अटैक, दुर्घटना, एलर्जी, किडनी फेल, लिवर फेल होने के कारण जान पर बन आने की स्थिति से भी ये मरीज को निकालने में सक्षम होंगे।
200 बेड के इस विभाग में 40 बेड इमरजेंसी रिसीविंग स्टेशन के रूप में होंगे।
यहां पहुंचते ही मरीज को जरूरत के अनुसार इलाज मिलने लगेगा। विशेषज्ञों की मानें तो इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खुलने से मरीज को प्रोटोकॉल के हिसाब से इलाज मिलेगा।
प्रशिक्षित चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सेस और अन्य स्टाफ होने से इमरजेंसी में आने वाले मरीज के लिए जरूरी ‘गोल्डेन ऑवर’ का ‘लॉस’ भी नहीं होगा। इससे मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
पेंटागन स्टाइल का होगा भवन
इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के भवन को पेंटागन स्टाइल का बनाने की योजना है।यह भवन अभी संजय गांधी पीजीआई परिसर में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना भवन के पीछे स्थित खाली भूमि पर बनेगा।
सात मंजिले इस भवन में मरीज की रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी जांच से लेकर भर्ती करने की सुविधा होगी।