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UP: आरटीआई में देरी और भ्रामक सूचना देने पर तीन अधिकारियों पर जुर्माना, वेतन से राशि काटने का आदेश

Wed, 24 Jun 2026 08:30 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सूचना मांगने पर समय सीमा में जवाब न देने और भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने तीन अधिकारियों पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने माना कि सूचना देने में अनावश्यक देरी की गई और नियमों का सही पालन नहीं हुआ। जुर्माने की राशि वेतन से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
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आरटीआई फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी और भ्रामक सूचना देने के मामले में तीन अधिकारियों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई औरैया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक प्रकरण में की है।

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आयोग में कुलदीप कुमार चतुर्वेदी की शिकायत पर सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता ने 24 जून 2022 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया कार्यालय में सूचना के लिए आवेदन दिया था। आयोग के अनुसार निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। 

करीब एक वर्ष की देरी के बाद 26 जुलाई 2023 को सूचना दी गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी का अधिकारियों ने कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कई अवसर दिए, लेकिन अधिकारियों की ओर से उचित जवाब नहीं मिला। आयोग ने यह भी माना कि सूचना देने से इनकार करने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1) का अनुचित आधार लिया गया। 
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राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने अपने आदेश में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत है। 

आयोग ने तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस राजपूत, तत्कालीन बीएसए अनिल कुमार और वर्तमान बीएसए संजीव कुमार पर संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह राशि तीनों अधिकारियों के वेतन से समान रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
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