विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति केपदाधिकारियों ने मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों एवं परियोजना मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। एलान किया कि अब बिजली कार्मिकों के साथ ही किसान व अन्य उपभोक्ता भी उनके साथ जुड़़ रहे हैं।
संघर्ष समिति की मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक में तय किय गया कि बिजली कर्मियों के 181 दिन से आंदोलन चल रहा है। अभी तक प्रबंधन पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल के निजीकरण का टेंडर नहीं कर पाया है। भीषण गर्मी है। ऐसे में उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ न हो। इसलिए भी 29 से होने वाले अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार स्थगित किया जाता है। इस दौरान यह भी तय किया गया कि जिलों में और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन पहले की तरह चलता रहेगा। इस बीच किसी कार्मिक के खिलाफ प्रबंधन ने कार्रवाई की तो वे सड़क पर उतरने के लिए विवश होंगे। इस दौरान संजय सिंह चौहान, जितेंद्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडे, महेंद्र राय, पीके दीक्षित, सुहेल आबिद, चंद्रभूषण उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
पावर कार्पोरेशन अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल ने निर्देश दिया कि आंदोलन के जरिए बिजली आपूर्ति प्रभावित करने वाले अभियंताओं और कार्मिकों की पहचान की जाए। उनकी सूची तैयार करें। ऐसे लोगों को कार्पोरेशन की ओर से भेजी गई एडवाइजरी भी भेज दें। अध्यक्ष ने निर्देशित किया कि बायोमीट्रिक हाजिरी हर स्थान पर सुनिश्चित की जाए। वह मंगलवार को शक्ति भवन में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा है कि जितनी बिजली आपूर्ति हो, उसी हिसाब से राजस्व संग्रह होना चाहिए। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। जहां भी लाइन हानियां बढ़ी हैं तथा राजस्व वसूली में कमी आई है, वहां जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विद्युत बिल वसूलने में भीषण सख्ती बरती जाए। अध्यक्ष ने कहा कि श्रेणी एक व दो के अधिकारी 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने में योगदान दें। ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त ना हो इस पर लगातार सजग़ता बरतिए। अध्यक्ष ने कहाकि ऊर्जा क्षेत्र का रिफार्म प्रदेश की बेहतरी के लिए किया जा रहा है।