उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए लिखा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के क्लस्टर में तीन पूर्वांचल और दो दक्षिणांचल में बनाए गए। अब इसी आधार पर निजीकरण का मसौदा तैयार किया गया है। लॉस रिडक्शन में पूर्वांचल में करीब 4519 करोड़ और दक्षिणांचल में 3798 करोड़ का टेंडर अवॉर्ड किया गया। इसमें 8317 करोड़ खर्च हो चुका है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर में दक्षिणांचल में 4947 करोड़ और पूर्वांचल में 7151 करोड़ का टेंडर अवॉर्ड किया गया जिसमें 12098 करोड़ खर्च किया जा रहा है। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद इसे निजी हाथों में देकर संबंधित कंपनी को उपकृत करने की चाल है। इसलिए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।