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यूपी: सरकार चाहती थी अनुपूरक बजट पर चर्चा, सपा दोहराती रही चढ़ावा चोरी पर बहस की मांग; धुल गया मानसून सत्र

Wed, 05 Aug 2026 09:28 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP Monsoon Session 2026: यूपी विधानसभा का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। छह अगस्त तक चलने वाले सदन को एक दिन पहले ही खत्म कर दिया गया। 
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यूपी विधानसभा का मानसून सत्र। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे की वजह से विधानसभा की कार्यवाही तीन दिन में महज पौने तीन घंटे की संचालित हो पाई। सत्र के दौरान सदन की कुल तीन बैठकें हुईं। कुल 5 घंटे 32 मिनट की कार्यवाही में 2 घंटे 49 मिनट का स्थगन रहा, जबकि 2 घंटे 43 मिनट तक सदन की कार्यवाही संचालित हुई। इस दौरान विभिन्न विधायी, संसदीय एवं अन्य जरूरी कार्य संपन्न हुए।

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तीन दिवसीय सत्र में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया। इनमें राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक, राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक, दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) विधेयक, निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, उप्र निजी विश्वविद्यालय (तृतीय संशोधन) विधेयक, उप्र निजी विश्वविद्यालय (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, रजिस्ट्रीकरण (उप्र संशोधन) विधेयक, भारतीय स्टाम्प (उप्र संशोधन) विधेयक, उप्र वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय विधेयक तथा उप्र विनियोग (2026-27 का अनुपूरक) विधेयक शामिल हैं। वहीं विधानसभा सचिवालय की याचिका समिति को कुल 435 याचिकाएं प्राप्त हुईं। 

साथ ही कुल 2,427 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 490 तारांकित तथा 1,466 अतारांकित प्रश्न स्वीकार किए गए। इनमें से 120 तारांकित एवं 838 अतारांकित प्रश्नों के उत्तर शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए। 95.67 प्रतिशत प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए तथा उनके उत्तर भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराए गए, जिससे विधानसभा की ई-विधान प्रणाली एवं डिजिटल संसदीय व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिली।

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सदन में उजागर हुआ सपा का दलित-पिछड़ा, युवा, गरीब व महिला विरोधी चरित्रः योगी

विधानसभा सदन में सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
 विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान सपा के भारी हंगामे के चलते निर्धारित तिथि से एक दिन पहले ही सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान सपा सदस्यों के रवैया ने उनके दलित-पिछड़ा, युवा, किसान, गरीब व महिला विरोधी चेहरे को एक बार फिर उजागर किया है। सपा ने इन तबकों के साथ भारी अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि सपा के नकारात्मक रवैये के कारण अनुपूरक बजट की जन-कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा नहीं हो पाई। सीएम ने कहा कि सपा ने इस सदन को नहीं, बल्कि दलितों-पिछड़ों, युवाओं, किसानों, महिलाओं व गरीबों के अवसर बाधित करने का काम किया है।

बुधवार को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विधानभवन में मुख्यमंत्री पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका असली चरित्र ही दलित, पिछड़ा, युवा, गरीब, किसान, महिला विरोधी रहा है। सपा का चरित्र अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक, शर्मनाक व इन सभी तबकों के साथ अनर्थ करने वाला रहा है। सदन में सपा के व्यवहार की निंदा करते हुए सीएम ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त भी किया कि सपा चाहे जितना अवरोध खड़ा करे, लेकिन डबल इंजन की सरकार पिछले सवा 9 वर्षों में जिस तरह से प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए कार्य किया है, वह बिना रुके, डिगे, थके आगे बढ़ता रहेगा।

सीएम ने मानसून सत्र में युवाओं के रोजगार, स्किलिंग कार्यक्रमों को बढ़ाने की मंशा के साथ किसानों, गरीबों के कल्याण के लिए नए कार्यक्रम और महिलाओं के सम्मान-स्वावलंबन के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की कोशिश की है और इसी उद्देश्य से 59 हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई थी। इसमें कई जन-कल्याणकरी योजनाओं व कार्यक्रमों के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है। सरकार नई योजनाओं को घोषित करने के लिए सदन में सार्थक चर्चा कराना चाहती थी, लेकिन सपा ने नकारात्मक रवैये के कारण चर्चा नहीं होने दी। इनका आचरण असंवैधानिक होने के साथ ही युवा, किसान, महिला व गरीब विरोधी भी है। सीएम ने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, रसोइए, ग्राम चौकीदार, कोटेदार समेत सरकार ने हर उस तबके के हित में काम करने का प्रयास किया था, जिनके मानदेय बढ़ने हैं। निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन में वृद्धि और नए पात्र लोगों को जोड़ने के प्रावधानों पर सदन में चर्चा होनी थी, लेकिन सपा ने बाधा खड़ा किया। इसके बावजूद विधानसभा ने अनुपूरक मांगों को पारित किया है।
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कर्मठ तबके को अपमानित करने वाला है सपा का चरित्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा का यह चरित्र, अल्प मानदेय के बावजूद प्रदेश के विकास व 25 करोड़ जनता की सेवा में जुटे तबके को अपमानित करने वाला है। इससे पहले भी इन लोगों ने शिक्षामित्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया था। शिक्षामित्रों को पहले 3000 मानदेय मिलता था, लेकिन हमारी सरकार ने इसे बढ़ाकर पहले 10 हजार और फिर 18 हजार किया। अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया। साथ ही बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।

महापुरुषों का भी किया अपमान
सीएम ने कहा कि अनुपूरक मांगों में हम सामाजिक न्याय के पैरोकार रहे महापुरुष बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, महर्षि वाल्मीकि, संत शिरोमणि रविदास, संत ज्योतिबा फुले, शाहूजी महाराज, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर आदि की मूर्तियों पर छाजन, पार्क, बाउंड्रीवाल के लिए हमने 407 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह बजट पास न हो, इसलिए सपा ने सदन की कार्यवाही को बाधित किया। सपा के विरोध के बाद भी ये सभी कार्य आगे बढ़ेंगे और सामाजिक न्याय के पुरोधाओं को सम्मान मिलेगा।
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