द्रोणम में ऐसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो दुश्मन ड्रोन को कबाड़ बना देता है। यह प्रणाली 1 से 8 किलोमीटर की दूरी तक के ड्रोन को पहचानने और उन्हें जाम करके निष्क्रिय करने में सक्षम है। यानी ये दुश्मन ड्रोन के हार्डवेयर को बेकार कर देती है। इसके जरिए ड्रोन उड़ने या नियंत्रित होने में सक्षम नहीं रहता और गिर जाता है। द्रोणम को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है।
राइफल की तरह हाथ में पकड़कर इस्तेमाल की जाने वाली एंटी-ड्रोन गन है। इसे बैगपैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। पीठ पर पहनकर फील्ड ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा किसी वाहन या स्थायी जगह पर लगाया जा सकता है, जो चारों दिशाओं में निगरानी करता है।
इसी वजह से द्रोणम को सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में आसानी से तैनात किया जा सकता है। इसने वर्ष 2024 में 260 से ज्यादा ड्रोन नष्ट किए गए। इन ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और ड्रग्स भेजे जा रहे थे। पंजाब सीमा पर द्रोणम की मदद से ड्रोन घुसपैठ को निष्क्रिय करने की दर 3% से बढ़कर 55% तक पहुँच गई है।