इस मामले में एसटीएफ ने प्रदेश से 26 लोगों को दबोचा है। अब इस पेपर लीक कांड की जांच के दायरे में परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कर्मचारी, पेपर प्रकाशन से जुड़े लोग भी आ गए हैं। एसटीएफ इन सभी की कुंडली खंगाल रही है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर लीक करने में जालसाजों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रयोग किया है। इसकी शुरूआत झांसी के ऋषि शर्मा ने सबसे पहले की। उसने टीईटी पेपर को सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप पर वायरल कर दिया। उसने यह पेपर कुछ चिह्नित लोगों को भेजा गया। ताकि उनके जरिए अन्य को भेजा जा सके। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक पेपर लीक करने वाले गिरोह में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया है। पेपर भेजने के बाद जिन नंबरों से लीक कराए गये थे वह तत्काल बंद कर दिये गये। ताकि कोई तलाश न कर सके।
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एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर को लीक करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप का प्रयोग किया गया। इस प्लेटफार्म के जरिए गिरोह के सक्रिय सदस्यों को पेपर भेजा गया। सभी को गिरोह के सरगना ने तत्काल दुसरे नंबर अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लेकर मोबाइल बंद करने का निर्देश दिया था। एसटीएफ ने जब इसकी जांच शुरू की तो सबसे पहले झांसी निवासी ऋषि शर्मा ने पेपर को सोशल मीडिया प्लेटफार्म व्हाट्सएप पर अपलोड किया था। इसके बाद से ही उसका मोबाइल नंबर बंद बता रहा है। हालांकि एसटीएफ की दो टीमें उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक पेपर लीक करने के मामले में हर पहलुओं की जांच की जा रही है। इस गिरोह के नेटवर्क के जड़ में पहुंचने के लिए एसटीएफ की पूरी टीम ने अपना जाल बिछा दिया है। अधिकारी के मुताबिक शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। कहीं इस कंपनी के किसी कर्मचारी का संपर्क पेपर लीक करने वाले गिरोह से तो नहीं है। वहीं इसके अलावा जिस जगह से पेपर का प्रकाशन किया गया, उनके कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस इन दोनों एजेंसियों के हर सदस्यों के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकाल रही है।