संतोष ने पूछताछ में बताया कि 26 नवंबर को नोएडा से लखनऊ पहुंचा। 27 को रोशन पटेल से 8 बजे रात को मुलाकात हुई। उसी दिन मेरी बात राहुल मिश्रा से हुई तो उसने 40 लाख रुपये में पेपर देने के लिए कहा था लेकिन मना कर दिया।
इसके बाद बातचीत के दौरान सौदा 20 लाख रुपये में तय हो गया। राहुल ने रात 11.30 बजे पेपर को सोशल मीडिया साइट व्हाट्सएप पर भेज दिया। इसके बाद रोशन से बात कर 12 बजे मैंने पेपर भेज दिया। रोशन से पांच लाख रुपये में पेपर का सौदा किया था। इसके अलावा करीब 3 से 4 अपने अन्य करीबी लोगों को भी पेपर भेजा था। जिससे मुझे करीब 10 लाख रुपये मिले थे।
पेपर लीक होने की जानकारी होने पर अपना मोबाइल तोड़कर कर लखनऊ से भाग गया था। इस दौरान फरीदाबाद, नैनीताल, इंदौर व इटावा में घूमता रहा। इस दौरान दर्जनों सिम व मोबाइल का प्रयोग किया। एसटीएफ के अधिकारी आरोपी संतोष के करीब एक दर्जन से अधिक बैंक खातों के बारे में जानकारी हासिल कर डिटेल निकलवा रही है।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी लालप्रताप सिंह के मुताबिक आरोपी संतोष चौरसिया के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कौशांबी में मुकदमा तो दर्ज ही है। वहीं उसके खिलाफ मध्य प्रदेश के ग्वालियर व इंदौर जिले में भी जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, परीक्षा अधिनियम, साजिश रचने जैसे संगीन धाराओं में 6 मुकदमें दर्ज हैं। इसमें पांच ग्वालियर के झांसी रोड थाने में और एक इंदौर के चंदरनगर में दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक संतोष ने फर्जी तरीके से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी।