लेदर उद्योग (कानपुर-उन्नाव) : खाड़ी बाजार पर निर्भरता के कारण ऑर्डर घटने का जोखिम।
कृषि व खाद्य प्रसंस्करण : भुगतान चक्र में देरी का असर।
एमएसएमई निर्यातक : शिपिंग बीमा और मालभाड़ा बढ़ने से मार्जिन घट सकता है।
कंटेनर कारोबारी मोहम्मद शिराज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं हैं तो फैक्ट्री संचालन लागत, माल ढुलाई खर्च, कंटेनर शिपिंग चार्ज, निर्यात प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा। बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों पर असर सीमित रह सकता है, लेकिन छोटे और मध्यम उद्योगों पर दबाव अधिक रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय हालात जल्दी सामान्य हो जाते हैं तो निर्यात पर असर सीमित रह सकता है। लेकिन लंबा तनाव रहने पर ऑर्डर में अस्थायी गिरावट, भुगतान में देरी, लॉजिस्टिक बाधाएं, निर्यात लागत में वृद्धि हो सकती है।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के एके श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव यदि लंबा खिंचता है तो उत्तर प्रदेश के निर्यात पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह का असर पड़ सकता है। आशंका है कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहने पर यूपी के कुल निर्यात में 3 से 8 प्रतिशत तक अस्थायी गिरावट आ सकती है।
संभावित आर्थिक असर
1-तनाव 1–2 महीने में सामान्य हुआ तो शिपिंग लागत 5–7% बढ़ेगी। ऑर्डर अस्थायी रूप से धीमे होने पर निर्यात पर 2–3% प्रभाव।
2-तनाव 6 माह तक जारी रहा तो समुद्री बीमा व मालभाड़ा 10–20% महंगा होगा। छोटे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा घटेगी और निर्यात में 5–8% तक कमी आ सकती है। भुगतान चक्र 30–60 दिन तक खिंच सकता है।
3- तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हुआ तो परिवहन लागत बढ़ने से उत्पादन लागत 4–6% तक बढ़ सकती है। एमएसएमई सेक्टर पर गंभीर दबाव होगा।