उपचुनाव में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसके लिए पार्टी ने चुनावी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। अब तय किया गया है कि जिस सीट पर जिस जाति की बहुलता होगी, उसी जाति के विधायक के नेतृत्व में एक विशेष टीम काम करेगी। इस टीम में भी उसी जाति के सर्वाधिक कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल किए जाएंगे। यानि सभी 10 विधायकों की जातिगत समीकरण के लिहाज से अलग-अलग टीम बनाकर प्रचार में उतारा जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव प्रचार के लिए गठित सभी टीमों को छठ पर्व बीतने के बाद से ही फील्ड में सक्रिय रहने को कह दिया गया है। वहीं, 30 मंत्रियों की टीम के नीचे काम करने के लिए बनाई गई स्थानीय पदाधिकारियों की टीम में पिछड़े व दलित समाज के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को शामिल उनकी ही जाति की बस्तियों में कैंप करने को कहा गया है।