रबी सीजन की बोवाई से पहले कृषि विभाग खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए अलर्ट हो गया है। इसके लिए सीमावर्ती जिलों में विशेष टीमें तैनात की गई हैं। प्रदेश में एक से 12 अक्तूबर के बीच 2.49 लाख मीट्रिक टन खाद वितरित की जा चुकी है, जबकि गोदामों में 33.10 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
रबी सीजन में खाद की मांग बढ़ने के साथ कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आती हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में ऐसी शिकायतें अधिक मिलती हैं। इसे देखते हुए अक्तूबर के पहले सप्ताह से निगरानी बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती जिलों में स्थानीय टीमों के साथ प्रदेश मुख्यालय के अधिकारियों को भी लगाया गया है। ये अधिकारी सप्ताह में एक दिन संबंधित जिले में जाकर गोपनीय निगरानी करेंगे। खाद की उपलब्धता और खपत का ब्योरा जुटाकर समीक्षा करेंगे। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
इंडो-नेपाल सीमा पर 14 के खिलाफ रिपोर्ट, 315 लाइसेंस रद्द
प्रदेश में अप्रैल से अब तक इंडो-नेपाल सीमा से लगे जिलों में 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें पीलीभीत के दो, महराजगंज के चार, सिद्धार्थनगर के सात और श्रावस्ती का एक व्यक्ति शामिल है। प्रदेशभर में 16 हजार से अधिक दुकानों की जांच की गई है। गड़बड़ी मिलने पर 315 दुकानदारों के लाइसेंस रद्द किए गए, जबकि 48 के खिलाफ विभिन्न मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
पिछले साल से 8.43 लाख मीट्रिक टन अधिक खाद उपलब्ध
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 16.14 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.91 लाख डीएपी, 5.44 लाख एनपीके, 4.12 लाख एसएसपी और 1.49 लाख मीट्रिक टन एमओपी (पोटाश) उपलब्ध है। वर्ष 2025 की तुलना में इस बार 8.43 लाख मीट्रिक टन अधिक खाद है। पांच रैक खाद रास्ते में हैं, जो जल्द विभिन्न जिलों में पहुंचेंगी।
कोट-
संयुक्त निदेशक (उर्वरक) डॉ. हरेंद्र मिश्रा का कहना है कि रबी सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध है। किसानों को जरूरत से ज्यादा खाद नहीं खरीदनी चाहिए और किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए। उन्हें जरूरत के अनुसार खाद मिलेगी। विभाग कालाबाजारी और जमाखोरी नहीं होने देगा।