सुप्रीम कोर्ट द्वारा कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने को लेकर शिक्षक अभी संतुष्ट नहीं हैं। वे इस मामले में केंद्र सरकार से टीईटी अनिवार्यता से छूट के लिए संशोधन करने की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार से उन्होंने काली पट्टी बांधकर काम किया।
अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने बताया लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, अयोध्या, गोंडा आदि जिलों में शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। यह विरोध 15 अक्तूबर तक चलेगा। शिक्षक केंद्र सरकार से 2017 में किए गए संशोधन को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी आंदोलन करेंगे। यदि हमारी मांग नहीं मानी जाती है तो शिक्षक दिल्ली में धरना देने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इसी क्रम में शिक्षक हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं। वे इसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजेंगे।
केंद्र सरकार करे टीईटी मामले में पहल
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। राज्य सरकार ने इसके लिए पहल करते हुए रिव्यू में जाने का निर्णय लिया किंतु यह पूरे देश से जुड़ा प्रकरण है। ऐसे में केंद्र सरकार को इसके लिए पहल करनी होगी। संगठन के दिलीप चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शालिनी मिश्रा, सचिव राकेश तिवारी, मीडिया प्रभारी विनीत सिंह, संगठन मंत्री शशि प्रभा सिंह ने कहा कि यह निर्णय शिक्षकों के प्रति संवेदनहीनता दिखाता है। जल्द इसे लेकर पहल न की गई तो बड़ा आंदोलन होगा।
जनप्रतिनिधियों को दे रहे ज्ञापन
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में संशोधन के लिए केंद्र द्वारा आवश्यक कदम उठाए जाएं। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए नवरात्रि के पहले दिन सोमवार से पूरे सप्ताह पदाधिकारी व शिक्षक अपने-अपने जिले के मंत्री, सांसद, विधायक को ज्ञापन देंगे।