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यूपी: प्रदेश में बढ़ता जा रहा है स्वाइन फ्लू का प्रकोप, मंगलवार को मिले चार नए संक्रमित; 21 तक पहुंची संख्या

Tue, 01 Sep 2026 08:23 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Swine flu outbreak in UP: यूपी में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंगलवार को चार नए मरीज लखनऊ में मिले हैं। 
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स्वाइन फ्लू का प्रकोप कितना खतरनाक? - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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शहर में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को चार नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें दो मरीजों की जांच पीजीआई, एक की लोहिया संस्थान और एक की निजी लैब में हुई है। जिले में स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।

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स्वाइन फ्लू से ग्रस्त एक महिला की जान चा चुकी है। कई मरीज अभी इसकी चपेट में हैं। नए मरीजों को सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। डॉक्टरों की सलाह पर मरीजों ने एच1एन1 की जांच कराई। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संक्रमण की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीजों की निगरानी कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण को लेकर डरने की जरूरत नहीं हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि स्वाइन फ्लू को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। जो लोग पहले से गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी, दिल, ट्रांसप्लांट जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। वह सतर्क रहे। उन्होंने लोगों से खुद दवा लेने या किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति से इलाज कराने से बचने की भी अपील की।

क्या है इंफ्लूएंजा एच1एन1
इंफ्लूएंजा एक सामान्य वायरल बीमारी है, जो इंफ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। एच1एन1 इसी वायरस का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से सांस से जुड़ी बीमारी पैदा करता है। एच1एन1 वायरस से संक्रमित होने के बाद आमतौर पर दो से तीन दिन में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड एक से चार दिन तक हो सकता है। कुछ मामलों में यह अवधि सात दिन तक भी हो सकती है।

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ऐसे फैलता है संक्रमण

केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि एच1एन1 एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने और छींकने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों के जरिए फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित वस्तुओं या सतहों को छूने, हाथ मिलाने और हाथों की ठीक से सफाई न करने से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

ये रहे संजीदा
  •गर्भवती महिलाएं
•रक्त संबंधी बीमारी, डायबिटीज, तंत्रिका तंत्र की बीमारी, कैंसर या एचआईवी से पीड़ित लोग
•फेफड़े, हृदय, किडनी या लीवर की बीमारी से पीड़ित लोग
•लंबे समय से कॉर्टिसोन जैसी दवाओं का इलाज ले रहे मरीज।

बचाव
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को कपड़े या रुमाल से ढकें
  • बातचीत करते समय करीब एक से डेढ़ मीटर की दूरी बनाए रखें
  • हाथ मिलाने से बचें
  • हाथ मिलाने या संक्रमित वस्तु को छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
  • बुखार, खांसी या जुकाम जैसे लक्षण होने पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।


 
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