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यूपी: केजीएमयू में डेंगू से छात्रा की मौत, छुट्टी न मिलने पर छात्रों फूटा गुस्सा; 15 घंटे तक दिया धरना

Mon, 21 Sep 2026 07:20 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

लखनऊ के केजीएमयू में बीएससी नर्सिंग की छात्रा की डेंगू से मौत के बाद साथी छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि बीमारी के बावजूद छुट्टी नहीं दी गई। हॉस्टल में गंदगी, दूषित पानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत भी की गई। छात्रों ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।
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छुट्टी न मिलने पर छात्रों फूटा गुस्सा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केजीएमयू में बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा की डेंगू से मौत होने से नाराज साथी छात्र-छात्राओं का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। छात्र-छात्राओं ने कक्षाएं बंद कर करीब 15 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। आरोप है कि बीमार के बाद भी छात्रा को छुट्टी नहीं दी गई।

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हालत बिगड़ने पर 17 सितंबर की शाम उसके माता-पिता हॉस्टल पहुंचे। उसे लेकर बनारस चले गए। जहां साईं हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 19 सितंबर की सुबह करीब पांच बजे उसकी मौत हो गई। नाराज छात्राओं ने केजीएमयू में नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल समेत अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।

छात्राओं के मुताबिक, दिव्यांशी बनारस की रहने वाली थी। उसे 11 सितंबर को बुखार आया था। साथी उसे मेडिसिन विभाग की ओपीडी में ले गए। जहां डॉक्टरों ने देखा। बुखार की पहचान के लिए 16 सितंबर को डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड समेत अन्य जांचें कराई गईं।

छात्राओं के मुताबिक दिव्यांशी की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। छात्राओं का आरोप है कि तबीयत खराब होने के बावजूद छुट्टी मांगने पर उसे अवकाश नहीं दिया गया। इसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। माता-पिता 17 सितंबर की शाम हॉस्टल पहुंचे। बेटी को साथ लेकर बनारस चले गए।

वहां निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत की खबर कॉलेज पहुंचते ही सोमवार सुबह छात्राओं में आक्रोश फैल गया। कक्षाएं बंद कर धरना शुरू कर दिया गया। दिनभर कॉलेज परिसर में हंगामा और बवाल चलता रहा। पुलिस और नर्सिंग कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़ी रहीं।

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छात्राओं का आरोप है कि बीमारी की स्थिति में भी प्रिसिंपल के जरिये छुट्टी नहीं दी गई। छात्राओं ने कॉलेज की प्रिंसिपल समेत अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई और व्यवस्था में सुधार की मांग की है। साथ ही कॉलेज में बीमारी से बचाव के लिए कोई भी इंतजाम नहीं होने का भी आरोप लगाया।

हॉस्टल में सात छात्राएं बीमार

नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाली सात छात्र व छात्राएं बीमार हैं। इसमें आकक्षी, आयुषी कुमारी, सत्यम सिंह समेत अन्य छात्र-छात्राएं बीमार हैं। इनका इलाज सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। आरोप हैं कि बीमारी के बावजूद वार्डों में ड्यूटी लगाई जा रही है। छात्र-छात्राओं को तंग किया जा रहा है।

छात्राओं के मुताबिक इनमें कुछ को टाइफाइड और कुछ को डेंगू की शिकायत है। सभी का इलाज चल रहा है। इसके अलावा हॉस्टल की मेस में खाना बनाने वाला कुक भी बीमारी की चपेट में है। छात्राओं का आरोप है कि संक्रमण के बावजूद बीमारी की रोकथाम के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हॉस्टल में वैक्सीनेशन भी नहीं कराया जा रहा है। छात्राओं ने बीमार विद्यार्थियों को समय पर छुट्टी देने और स्वास्थ्य जांच व संक्रमण रोकथाम की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

 

 

 
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गंदे पानी की हो रही आपूर्ति

नर्सिंग हॉस्टल में छात्राओं को पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल रहा है। छात्राओं का आरोप है कि पानी की टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। टंकी में गंदगी जमा है। इससे गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। छात्राओं के मुताबिक गंदा पानी पीने से कई छात्राएं टाइफाइड समेत पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। कई छात्र-छात्राओं में त्वचा संबंधी समस्याएं भी सामने आई हैं। छात्राओं ने हॉस्टल की पानी की टंकियों की सफाई, शुद्ध पेयजल और नियमित जांच की व्यवस्था कराने की मांग की है।

 

 
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