एसटीएफ की कार्रवाई के बाद टोल प्लाजा का सर्वर उसके पास नहीं रहा। इसके चलते टोल वसूली की प्रक्रिया ठप हो गई। एसटीएफ जब्त किए गए सर्वर और डीवीआर की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फर्जी फास्टैग वाले वाहनों ने कितनी बार टोल पार किया और इस खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे।
एक फास्टैग, दो नंबर का खेल
जांच में सामने आया था कि गिरोह असली वाहन के बजाय दूसरे वाहन के नंबर पर फास्टैग बनवाता था। चेकिंग के दौरान भी उसी फर्जी नंबर की पर्ची दिखाई जाती थी। ऑनलाइन चालान होने पर वह दूसरे वाहन के नाम दर्ज हो जाता था। इस तरह टोल चोरी के साथ कार्रवाई से बचने का रास्ता भी तैयार किया गया था।